Edited By Pooja Gill,Updated: 30 Jan, 2026 11:03 AM

सहारनपुर: यूपी के सहारनपुर मंडल में समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के बीच बढ़ती राजनीतिक तल्खी ने विपक्षी एकता की तैयारियों को बड़ा झटका दिया है। विधानसभा चुनाव 2027 की रणनीति पर सपा नेतृत्व के...
सहारनपुर: यूपी के सहारनपुर मंडल में समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के बीच बढ़ती राजनीतिक तल्खी ने विपक्षी एकता की तैयारियों को बड़ा झटका दिया है। विधानसभा चुनाव 2027 की रणनीति पर सपा नेतृत्व के निर्देशों के बाद जहां पार्टी ने जमीनी स्तर पर सक्रियता बढ़ाई है, वहीं कांग्रेस सांसद इमरान मसूद की मजबूत पकड़ और सीटों को लेकर बढ़ती दावेदारी से गठबंधन में खींचतान तेज हो गई है। सहारनपुर जिले की सात विधानसभा सीटों को लेकर सबसे ज्यादा विवाद बेहट और सहारनपुर देहात सीट पर है।
कम से कम पांच सीटों पर चुनाव लड़ेगी कांग्रेस
सपा एमएलसी शाहनवाज खान का दावा है कि कांग्रेस कम से कम पांच सीटों पर चुनाव लड़ेगी। उनका कहना है कि लोकसभा चुनाव में इमरान मसूद ने बेहट, सहारनपुर नगर और देहात में बड़ी बढ़त लेकर अपनी लोकप्रियता साबित की है। वहीं सपा विधायक आशु मलिक और उमर अली खान के साथ इमरान मसूद के रिश्ते लगातार तल्ख बने हुए हैं और दोनों पक्षों के बीच बयानबाजी जारी है। गंगोह और नकुड़ सीटों पर भी समीकरण जटिल हैं। गंगोह इमरान मसूद का गृह क्षेत्र है, जबकि नकुड़ से वह दो बार बेहद करीबी मुकाबले में हार चुके हैं। भाजपा की ओर से सैनी बिरादरी के मजबूत नेताओं की मौजूदगी और संभावित प्रत्याशियों के नामों ने मुकाबले को और दिलचस्प बना दिया है।
सपा-कांग्रेस के बीच तालमेल की कमी विपक्ष को कमजोर कर रही
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि मुस्लिम वोटों पर इमरान मसूद की पकड़ सपा नेताओं की तुलना में कहीं अधिक मजबूत है। जिले के मौजूदा हालात में जातीय और सामाजिक समीकरण भाजपा के पूरी तरह पक्ष में नहीं दिखते, लेकिन सपा-कांग्रेस के बीच तालमेल की कमी विपक्ष को कमजोर कर रही है। जानकारों का कहना है कि यदि गठबंधन में मतभेद दूर नहीं हुए तो भाजपा को सीधी चुनौती देना मुश्किल होगा। अब निगाहें अखिलेश यादव और राहुल गांधी पर टिकी हैं कि वे सहारनपुर में उभरे इस टकराव को कैसे सुलझाते हैं, क्योंकि यही विपक्ष की चुनावी ताकत तय करेगा।