Edited By Ramkesh,Updated: 18 Jan, 2026 01:17 PM

माघ मेले के दौरान मौनी अमावस्या स्नान पर रविवार को संगम तट पर उस समय बवाल खड़ा हो गया, जब ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने संगम में स्नान करने से पहले ही रोक दिया। शंकराचार्य ने पुलिस और प्रशासन पर अपने शिष्यों के साथ...
प्रयागराज: माघ मेले के दौरान मौनी अमावस्या स्नान पर रविवार को संगम तट पर उस समय बवाल खड़ा हो गया, जब ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने संगम में स्नान करने से पहले ही रोक दिया। शंकराचार्य ने पुलिस और प्रशासन पर अपने शिष्यों के साथ धक्का-मुक्की और बदसलूकी का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि उन्हें जानबूझकर स्नान से रोका गया, जिससे आहत होकर उन्होंने बिना स्नान ही लौटने का निर्णय लिया।
पुलिसकर्मियों ने शिष्यों के साथ की मारपीट- शंकराचार्य का आरोप
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने आरोप लगाया कि स्नान के लिए जाते समय उनके शिष्यों के साथ पुलिसकर्मियों ने मारपीट की और जबरन आगे बढ़ने से रोका। उन्होंने कहा कि संतों और श्रद्धालुओं के सम्मान के साथ ऐसा व्यवहार निंदनीय है। इस घटना के बाद उनके समर्थकों में नाराजगी देखी गई और मौके पर कुछ देर के लिए अफरा-तफरी का माहौल बन गया।
भारी भीड़ की वजह से शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती को रोका
वहीं, पुलिस और प्रशासन ने इन आरोपों को सिरे से खारिज किया है। प्रशासन का कहना है कि मौनी अमावस्या के कारण संगम तट पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी हुई थी। सुरक्षा और व्यवस्था बनाए रखने के लिए कुछ प्रतिबंध लगाए गए थे। पुलिस के अनुसार, शंकराचार्य को रथ से उतरकर पैदल संगम तट तक जाने का अनुरोध किया गया था, ताकि भीड़ को नियंत्रित किया जा सके।
शंकराचार्य को समझाने में जुट अधिकारी
पुलिस का दावा है कि आग्रह के बावजूद शंकराचार्य के समर्थक आगे बढ़ने पर अड़े रहे, जिसके चलते हल्की धक्का-मुक्की की स्थिति बनी। हालांकि, किसी प्रकार की जानबूझकर बदसलूकी या बल प्रयोग के आरोपों को प्रशासन ने गलत बताया है। फिलहाल शंकराचार्य का जुलूस रोका गया है और स्थिति को संभालने के लिए पुलिस व प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी मौके पर मौजूद हैं। मामले को शांतिपूर्ण ढंग से सुलझाने के प्रयास जारी हैं।