गाय को संपत्ति नहीं माता माना जाए- गोरक्षा को लेकर शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद का सरकार पर तंज

Edited By Ramkesh,Updated: 07 Mar, 2026 07:46 PM

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मी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने गोरक्षा के मुद्दे को लेकर प्रदेश सरकार पर तीखा हमला बोला है। शनिवार को उन्होंने कहा कि आज का राजा गाय को माता नहीं मान रहा है, बल्कि उसे संपत्ति के रूप में देखने लगा है।

वाराणसी: स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने गोरक्षा के मुद्दे को लेकर प्रदेश सरकार पर तीखा हमला बोला है। शनिवार को उन्होंने कहा कि आज का राजा गाय को माता नहीं मान रहा है, बल्कि उसे संपत्ति के रूप में देखने लगा है। ऐसे में उसे ललकारना आवश्यक हो गया है। ज्योतिर्मठ पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने शनिवार को वाराणसी से लखनऊ के लिए अपनी यात्रा की शुरुआत की। उन्होंने कहा कि 11 मार्च को लखनऊ पहुंचकर गोरक्षा अभियान का बड़ा शंखनाद किया जाएगा।

जौनपुर में महर्षि यमदग्नि आश्रम में किया पूजन
यात्रा के दौरान शंकराचार्य जौनपुर पहुंचे, जहां उन्होंने गोमती नदी के तट पर स्थित जमैथा गांव में महर्षि यमदग्नि मुनि के आश्रम में दर्शन-पूजन किया। इस दौरान उन्होंने कहा कि यह भूमि महर्षि यमदग्नि और भगवान परशुराम की तपोभूमि रही है और यहां सदियों से गाय की सेवा और संरक्षण की परंपरा रही है।

परशुराम की कथा का किया उल्लेख
शंकराचार्य ने कहा कि प्राचीन काल में एक राजा ने जबरन महर्षि यमदग्नि की गाय छीन ली थी। जब यह बात उनके पुत्र भगवान परशुराम को पता चली तो उन्होंने अन्याय के खिलाफ खड़े होकर राजा और उसकी सेना को पराजित कर गाय को वापस लिया था। उन्होंने कहा कि यह प्रसंग अन्याय के खिलाफ संघर्ष का प्रतीक है।

गोरक्षा को लेकर उठाई आवाज
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि भारतीय संस्कृति और सनातन परंपरा में गाय को माता के समान माना जाता है। यदि शासन व्यवस्था उसे केवल संपत्ति के रूप में देखेगी तो यह आस्था और परंपरा का अपमान होगा। इसलिए संत समाज इस मुद्दे पर आवाज उठाने के लिए बाध्य है।

लखनऊ में होगा बड़ा आंदोलन
उन्होंने बताया कि गौमाता को ‘राजमाता’ घोषित करने और उत्तर प्रदेश में पूर्ण गोकशी बंद कराने की मांग को लेकर सरकार को 40 दिन की समयसीमा दी गई थी, जो 11 मार्च को पूरी हो रही है। इसके बाद लखनऊ में आंदोलन को आगे बढ़ाया जाएगा।

सीएम योगी को दिया निमंत्रण
शंकराचार्य ने योगी आदित्यनाथ को भी इस अभियान से जुड़ने का निमंत्रण दिया। उन्होंने कहा कि गोरक्षा के लिए कानून बनना चाहिए और इसे अब और टाला नहीं जा सकता।

रास्ते में कई जिलों में स्वागत
यात्रा के दौरान सुलतानपुर के लम्भुआ में उनका स्वागत किया गया। यहां उन्होंने कहा कि आजादी के बाद से गोरक्षा कानून का सपना दिखाया गया, लेकिन अब तक इसे लागू नहीं किया गया। उन्होंने कहा कि वह इसी कानून को लागू कराने की मांग लेकर लखनऊ जा रहे हैं। शंकराचार्य के मीडिया प्रभारी संजय पांडेय के अनुसार यात्रा के दौरान संत समाज और अनुयायी भी उनके साथ मौजूद हैं। शंकराचार्य 11 मार्च को लखनऊ पहुंचकर गोरक्षा आंदोलन को आगे बढ़ाने की घोषणा करेंगे।

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