खामेनेई के निधन से शोक में डूबा ये गांव, UP के इस जिले से जुड़ी थी ईरान के सर्वोच्च नेता की विरासत, क्‍या है नाता ? जानिए पूरा किस्‍सा

Edited By Purnima Singh,Updated: 01 Mar, 2026 06:39 PM

khamenei s death sparks mourning in his mentor s ancestral village

अमेरिका और इजराइल के हमले में ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत की खबर मिलने से उत्तर प्रदेश के बाराबंकी के बदोसराय स्थित किंतूर गांव में गम का माहौल है। ऐसी मान्यता है कि खामेनेई के गुरु अयातुल्ला खुमैनी का किंतूर से पुश्तैनी...

बाराबंकी : अमेरिका और इजराइल के हमले में ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत की खबर मिलने से उत्तर प्रदेश के बाराबंकी के बदोसराय स्थित किंतूर गांव में गम का माहौल है। ऐसी मान्यता है कि खामेनेई के गुरु अयातुल्ला खुमैनी का किंतूर से पुश्तैनी रिश्ता था और उनके पूर्वज लगभग 150 साल पहले यहां से ईरान गए थे। हालांकि समय के साथ बहुत कुछ बदल गया है, लेकिन आज भी यहां के लोग उस वंशावली और उनके इतिहास को याद करते हैं। 

स्वयं को खुमैनी का वंशज बताने वाले सैयद निहाल अहमद काजमी ने रविवार को मीडिया को बताया कि बाराबंकी जिले के रामनगर में स्थित किंतूर गांव वर्ष 1979 में ईरान में हुई इस्लामी क्रांति के शिल्पी और नेतृत्वकर्ता रहे अयातुल्ला रूहुल्लाह मुसावी खुमैनी के दादा सैयद अहमद मुसावी का जन्मस्थान था। उन्होंने बताया कि मुसावी ने भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में सक्रिय भूमिका निभाई थी और वह वर्ष 1834 में एक धार्मिक यात्रा पर ईरान गए थे, क्योंकि वह स्वतंत्रता सेनानी थे इसलिए तत्कालीन अंग्रेज हुकूमत ने उन्हें भारत नहीं लौटने दिया। 

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काजमी ने बताया कि उसके बाद मुसावी ईरान के मशहूर शिक्षा केंद्र माने जाने वाले खुमैन शहर में बस गए, और वहीं पर उनके पौत्र अयातुल्ला रूहुल्लाह मुसावी खुमैनी की पैदाइश हुई थी। उन्होंने बताया कि खामेनेई ने खुमैनी की शागिर्दी की और उनके निधन के बाद उनकी विरासत को संभाला। काजमी ने अमेरिका और इजराइल के हमले में खामेनेई की मौत पर शोक व्यक्त करते हुए इसे इंसानियत पर हमला करार दिया। काजमी के भतीजे और खुमैनी के प्रपौत्र डॉक्टर सैयद रेहान काजमी ने बताया कि किंतूर से ईरान का गहरा नाता है, क्योंकि यह एक समय ईरान के सर्वोच्च नेता रहे अयातुल्ला रूहुल्लाह मुसावी खुमैनी का पुश्तैनी गांव है। 

रेहान ने कहा कि उनके परदादा के शिष्य अयातुल्ला खामेनेई की मौत से ईरान के साथ-साथ पूरी दुनिया के मुसलमानों को गहरा नुकसान हुआ है। उन्होंने कहा कि एक ऐसे रहनुमा को खोना, जो मानवता का संरक्षक था, अपने आप में बहुत बड़ी पीड़ा है। किंतूर वासी सैयद हुसैन जैदी ने खामेनेई की मौत पर गम और गुस्से का इजहार करते हुए कहा कि खामेनेई केवल मुसलमानों को नहीं बल्कि पूरी इंसानियत को रास्ता दिखाने वाले शख्स थे। 

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उन्होंने अमेरिका और इजराइल द्वारा की गई इस कार्रवाई को आतंकवादी हमला बताते हुए कहा, "हम सभी लोगों से अपील करते हैं कि शांति बनाए रखें। हिंसा किसी समस्या का हल नहीं है।" खामेनेई की मौत की खबर फैलते ही किंतूर और उसके आसपास के इलाकों में लोग इकट्ठा होने लगे। जगह-जगह दुआ फातिहा का आयोजन किया गया और दिवंगत आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की गई। कई स्थानों पर शोकसभा का आयोजन किया गया और दिवंगत नेता की आत्मा की शांति के लिए दुआएं की गईं। 

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