Edited By Moulshree Tripathi,Updated: 02 Oct, 2020 08:49 AM

इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने उत्तर प्रदेश के हाथरस जिले में 19 वर्षीय दलित युवती के साथ कथित सामूहिक बलात्कार और उसकी मौत के मामले में ...
प्रयागराजः इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने उत्तर प्रदेश के हाथरस जिले में 19 वर्षीय दलित युवती के साथ कथित सामूहिक बलात्कार और उसकी मौत के मामले में बृहस्पतिवार को राज्य सरकार के शीर्ष अधिकारियों को समन भेजा है।
इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ के न्यायमूर्ति राजन रॉय और न्यायमूर्ति जसप्रीत सिंह की पीठ ने उत्तर प्रदेश के अपर मुख्य सचिव, पुलिस महानिदेशक और अपर पुलिस महानिदेशक को समन जारी कर सभी से 12 अक्टूबर को अदालत में पेश होने और मामले में स्पष्टीकरण देने को कहा है। पीठ ने युवती के माता-पिता से भी कहा है कि वे अदालत आकर अपना पक्ष रखें। लखनऊ में अपर पुलिस महानिदेशक (कानून-व्यवस्था) प्रशांत कुमार ने कहा, ‘‘ एफएसएल की रिपोर्ट आ गयी है। उसमें स्पष्ट कहा गया है कि सैंपल में शुक्राणु नहीं मिले हैं। इससे स्पष्ट हो जाता है कि बलात्कार या सामूहिक बलात्कार नहीं किया गया। ''
उन्होंने कहा कि वारदात के बाद युवती ने पुलिस को दिए गए अपने बयान में भी अपने साथ बलात्कार होने की बात नहीं कही थी। उन्होंने कहा कि उसने सिर्फ मारपीट किए जाने का आरोप लगाया था। उन्होंने कहा कि लेकिन पुलिस ने यौन हमले के आरोप के बाद प्राथमिकी में बलात्कार का आरोप जोड़ा। हालांकि विशेषज्ञों ने सवाल उठाया कि क्या शुक्राणु नहीं मिलना निर्णायक ढंग से बलात्कार की संभावनाओं को नकारता है ।