'मशीन तो तुम्हें बांग्लादेशी बता रही है…', SHO ने पीठ पर लगाई 'नागरिकता जांच मशीन', UP Police के ‘अविष्कार’ का Video Viral, सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस!

Edited By Purnima Singh,Updated: 02 Jan, 2026 12:36 PM

ghaziabad police is using a machine to tell the citizenship

उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद में एक वायरल वीडियो काफी चर्चा का विषय बना हुआ है। गाजियाबाद के कौशांबी थाना क्षेत्र से जुड़ा एक वीडियो इन दिनों बहुत ही तेजी से सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। वायरल वीडियो में देखा जा सकता है कि कौशांबी थाना प्रभारी...

गाजियाबाद (संजय मित्तल) : उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद में एक वायरल वीडियो काफी चर्चा का विषय बना हुआ है। गाजियाबाद के कौशांबी थाना क्षेत्र से जुड़ा एक वीडियो इन दिनों बहुत ही तेजी से सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। वायरल वीडियो में देखा जा सकता है कि कौशांबी थाना प्रभारी निरीक्षक अजय शर्मा जब अपने थाने की पुलिस और सीआरपीएफ के साथ झुग्गियों में पहुंचे तो वहां एक व्यक्ति की पीठ पर कथित मशीन लगाकर उसकी नागरिकता जांचने की बात कहते नजर आ रहे हैं।  वीडियो में यह दावा किया जा रहा है कि मशीन ने व्यक्ति को बांग्लादेशी बताया है, जबकि संबंधित व्यक्ति खुद को बिहार के अररिया जिले का निवासी बता रहा है। साथ ही वह अपने डाक्यूमेंट्स भी दिख रहा है। 



सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस 
वीडियो वायरल होने के बाद कौशांबी थाने के इंचार्ज अजय शर्मा की इस जांच को लेकर सोशल मीडिया पर बहस शुरू हो गई है। स्थानीय निवासी यह सवाल उठा रहे हैं  कि क्या वास्तव में ऐसी कोई मशीन मौजूद है, जिससे किसी व्यक्ति की नागरिकता की पहचान की जा सके। वहीं कई अन्य स्थानीय लोग इसे पुलिस का दबाव बनाने वाला तरीका बता रहे हैं। 

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ऑपरेशन 'टॉर्च' के तहत चलाया नागरिकता पहचान अभियान  
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, यह मामला 23 दिसंबर का है। उस दिन कौशांबी थाना क्षेत्र के भोवापुर स्लम्स और बिहारी मार्केट इलाके में पुलिस ने आरआरएफ और सीआरपीएफ के साथ मिलकर सघन तलाशी अभियान चलाया था। यह अभियान रोहिंग्या और अवैध बांग्लादेशी नागरिकों की पहचान के लिए चलाया गया था, जिसे ऑपरेशन टॉर्च नाम दिया गया था। इस दौरान झुग्गियों में रह रहे लोगों के पहचान पत्रों की जांच की गई थी। 

एसीपी ने दी सफाई 
मामले पर सफाई देते हुए एसीपी इंदिरापुरम अभिषेक श्रीवास्तव ने कहा कि यह कोई तकनीकी या वैज्ञानिक जांच नहीं थी। उन्होंने बताया कि पुलिस ने झुग्गियों में रहने वाले लोगों की पहचान सत्यापित करने के लिए ऑपरेशन 'टॉर्च' चलाया था। जिसके तहत पूछताछ के दौरान पुलिसवालों द्वारा अलग अलग तरीके अपनाए गए। पुलिस अलग अलग तरीकों से सवाल कर जानकारी एकत्रित करती है। 


 

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