साल की पहली डुबकी से खुलेंगे मोक्ष के द्वार! 3 जनवरी से संगम पर शुरू होगा माघ मेला 2026—होंगे 6 महा-स्नान, जानिए सबसे पुण्यकारी दिन

Edited By Anil Kapoor,Updated: 02 Jan, 2026 11:24 AM

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Magh Mela 2026: हिंदू पंचांग के अनुसार माघ मास को बेहद पवित्र और पुण्य देने वाला माना जाता है। इस महीने में किया गया स्नान, दान, जप और तप व्यक्ति को विशेष आध्यात्मिक लाभ देता है। इसी कारण हर साल उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में भव्य माघ मेले का...

Magh Mela 2026: हिंदू पंचांग के अनुसार माघ मास को बेहद पवित्र और पुण्य देने वाला माना जाता है। इस महीने में किया गया स्नान, दान, जप और तप व्यक्ति को विशेष आध्यात्मिक लाभ देता है। इसी कारण हर साल उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में भव्य माघ मेले का आयोजन किया जाता है। यह मेला त्रिवेणी संगम के तट पर लगता है, जहां गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती का संगम होता है। माघ मेले में देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु, साधु-संत और कल्पवासी संगम में पवित्र स्नान करने पहुंचते हैं। धार्मिक मान्यता है कि माघ मास में संगम स्नान करने से पापों से मुक्ति, अक्षय पुण्य और आत्मिक शुद्धि प्राप्त होती है।

कब से कब तक लगेगा माघ मेला 2026?
साल 2026 में माघ मेला 3 जनवरी से शुरू होकर 15 फरवरी तक आयोजित किया जाएगा। इस दौरान संगम क्षेत्र में धार्मिक अनुष्ठान, प्रवचन, कल्पवास और स्नान-दान का सिलसिला चलता रहेगा।

माघ मेला 2026 की प्रमुख स्नान तिथियां
हालांकि पूरे माघ मास में स्नान करना शुभ माना जाता है, लेकिन कुछ तिथियां विशेष फलदायी होती हैं। इस वर्ष माघ मेले में 6 मुख्य स्नान पर्व होंगे—

पौष पूर्णिमा – 3 जनवरी 2026
* मकर संक्रांति – 14 जनवरी 2026
* मौनी अमावस्या – 18 जनवरी 2026
* बसंत पंचमी – 23 जनवरी 2026
* माघी पूर्णिमा – 1 फरवरी 2026
* महाशिवरात्रि – 15 फरवरी 2026

मौनी अमावस्या का विशेष महत्व
माघ मेले का सबसे बड़ा और महत्वपूर्ण स्नान पर्व मौनी अमावस्या माना जाता है। इस दिन संगम तट पर सबसे ज्यादा भीड़ उमड़ती है। धार्मिक मान्यता है कि मौन रहकर किया गया संगम स्नान पापों का नाश करता है, मन को शांति देता है और मोक्ष का मार्ग खोलता है। साल 2026 में मौनी अमावस्या 18 जनवरी को पड़ेगी।

स्नान के लिए सबसे शुभ समय
हिंदू धर्म में स्नान और दान के लिए ब्रह्म मुहूर्त को सबसे उत्तम समय माना गया है। ब्रह्म मुहूर्त का समय सुबह 4:00 बजे से 5:30 बजे तक होता है। इस समय संगम में स्नान करने से पुण्य का फल कई गुना बढ़ जाता है। श्रद्धालुओं को सलाह दी जाती है कि वे इसी समय पवित्र डुबकी लगाएं।

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