झांसी मंडलायुक्त के प्रयासों से जलसंस्थान के खर्च पर कसी नकेल, खुली प्रतिस्पर्धा को मिल रहा प्रोत्साहित

Edited By Ramkesh,Updated: 23 Mar, 2022 08:05 PM

due to the efforts of the jhansi divisional commissioner

उत्तर प्रदेश के झांसी मंडलायुक्त डॉ़ अजयशंकर पांडेय के जलसंस्थान में अनियमितताओं पर कसे प्रभावी शिकंजे के कारण अनावश्यक खर्चों पर जबरदस्त नकेल कसी गयी है। मंडलायुक्त ने कार्यभार संभालते के साथ ही विवादों से घिरे जल संस्थान की कार्यप्रणाली को सुधारने...

झांसी: उत्तर प्रदेश के झांसी मंडलायुक्त डॉ़ अजयशंकर पांडेय के जलसंस्थान में अनियमितताओं पर कसे प्रभावी शिकंजे के कारण अनावश्यक खर्चों पर जबरदस्त नकेल कसी गयी है। मंडलायुक्त ने कार्यभार संभालते के साथ ही विवादों से घिरे जल संस्थान की कार्यप्रणाली को सुधारने की मुहिम छेड़ दी थी जो आज भी बादस्तूर जारी है। उन्होंने जलसंस्थान को स्पष्ट निर्देश दिये कि भविष्य में जो भी निविदायें जल संस्थान द्वारा आमंत्रित की जायें उसमें खुली प्रतिस्पर्धा को प्रोत्साहित किया जाये। साथ ही कमीशन मुक्त आपूर्ति कर एक कड़ा संदेश निविदादाताओं को दिया जाये। मण्डलायुक्त की इस सख्ती और पारदर्शितापूर्ण कार्यप्रणाली की वजह से काफी गहरा असर दिखायी दे रहा है। इसी कड़ी में समरसेबिल मोटर मरम्मत में लगभग 26 से 47 प्रतिशत व इण्डक्शन मोटर में कुछ क्षमता की मोटर को छोड़कर अन्य में लगभग 2 से 3 प्रतिशत की कमी आ गई है।

 गौरतलब है कि झांसी डिवीजन जल संस्थान, झांसी की तीनों जनपदों में जलापूर्ति सुचारू व्यवस्था के लिए मोटर मरम्मत के लिए ई-निविदायें आमंत्रित की गई थीं। ई-निविदा प्रक्रिया में अनावश्यक शर्तों को हटाने के कारण अधिक से अधिक फर्मों ने निविदा में हिस्सा लिया। फर्मों के बीच अच्छी प्रतिस्पर्धा होने के कारण मोटर पम्प मरम्मत कार्य की दरों में काफी कमी आई है। उक्त निविदा प्रक्रिया में 10 से अधिक फर्मों द्वारा प्रतिभाग किया गया है। जल संस्थान के महाप्रबन्धक ने बताया कि मोटर पम्प मरम्मत खुली निविदा होने की वजह से समरसेबिल मोटर की रिवाईिंडग में लगभग 30 से 47 प्रतिशत की कमी हुई है। जिस पर जल संस्थान को लगभग 10 से 12 लाख की बचत होगी। इसके पूर्व भी मंडलायुक्त की पहल एवं सख्ती की वजह से ठेकेदारों की जो देनदारियां जलसंस्थान पर 24 करोड़ रू0 बतायी जा रही थीं, वह घटकर लगभग 05 करोड़ के आस-पास पहुंच गयीं हैं। यदि मंडलायुक्त द्वारा सख्ती न की जाती तो 19 करोड़ रू0 का चूना झांसी डिवीजन जलसंस्थान को लगना तय था।

मंडलायुक्त ने जलसंस्थान में जब अनियमितताओं को देखा था तो सबसे पहले ब्लीचिंग पाउडर खरीद मामले में गंभीर गडबडियों की जानकारी मिली थी जिसके बाद मंडलायुक्त के निर्देश पर तत्कालीन महाप्रबन्धक झंसी डिवीजन जलसंस्थान द्वारा आवश्यकता से अधिक ब्लीचिंग पाउडर के खरीद का आदेश निरस्त किया गया। वर्तमान महाप्रबन्धक झॉसी डिवीजन जलसंस्थान को यह निर्देश दिये गये कि पूरी शुचिता और ईमानदारी से टेंडरदाताओं को यह स्पष्ट निर्देश देकर ब्लीचिंग पाउडर खरीद के लिए निविदायें आमंत्रित की जायें। जिसके बाद यह 28084 /- रु. प्रति मीट्रिक टन से घटकर 21150/- रू0 है यह न्यूनतम दर गतवर्ष की तुलना में 6934 /- रु. कम है। वर्ष भर में सैंकड़ों मीट्रिक टन ब्लीचिंग पाउडर की खपत होती है। उस हिसाब से भी देखा जाय तो लगभग 7000/- रु. प्रति मीट्रिक टन की कम दर होने से ब्लीचिंग पाउडर की खरीद में जलसंस्थान को लाखों रुपयों की बचत होने की संभावना है। यदि पिछले वर्ष को ही आधार माना जाय तो गतवर्ष 300 मीट्रिक टन ब्लीचिंग पाउडर की खपत जलसंस्थान में हुई और इस गणना से 21 लाख रु. का सीधा लाभ जलसंस्थान को होगा। महाप्रबन्धक, जल संस्थान, द्वारा बताया गया कि जल संस्थान झॉसी में जो न्यूनतम दरें ब्लीचिंग पाउडर की प्राप्त हुई है, वह प्रदेश में सबसे कम है।
 

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