UP की दर्दनाक हकीकत! सड़क नहीं, मजबूरी का सफर... बैलगााड़ी में जन्म और इलाज के अभाव में 3 घंटे में बुझ गई नवजात की सांसें

Edited By Purnima Singh,Updated: 05 Feb, 2026 07:26 PM

childbirth in a bullock cart made headlines

उत्तर प्रदेश के हमीरपुर जिले के मौदहा ब्लॉक के गऊघाट छानी के मजरा परसदवा डेरा में बुनियादी सड़क और स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी ने हाल ही में दो अलग-अलग घटनाओं में स्थानीय लोगों की परेशानियों को उजागर किया। मंगलवार की रात एक गर्भवती महिला रेनू को...

हमीरपुर : उत्तर प्रदेश के हमीरपुर जिले के मौदहा ब्लॉक के गऊघाट छानी के मजरा परसदवा डेरा में बुनियादी सड़क और स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी ने हाल ही में दो अलग-अलग घटनाओं में स्थानीय लोगों की परेशानियों को उजागर किया। मंगलवार की रात एक गर्भवती महिला रेनू को बैलगाड़ी में लेकर अस्पताल ले जाते समय बीच रास्ते ही प्रसव हो गया, वहीं दो फरवरी को नवजात शिशु की इलाज की देरी के कारण मौत हो गई। 

बैलगाड़ी में प्रसव, जच्चा-बच्चा सुरक्षित
परसदवा डेरा की निवासी रेनू पत्नी हरिराम निषाद की हल्की-फुल्की प्रसव पीड़ा मंगलवार की रात बढ़ने लगी। बारिश और खराब रास्तों के कारण परिजन तुरंत अस्पताल नहीं पहुंचा सके। देर रात रेनू को उनका ससुर कृष्ण कुमार और जेठ सुखराम व अन्य महिलाएं बैलगाड़ी में लादकर सिसोलर सीएचसी ले जा रहे थे। रास्ते में ही रेनू ने पुत्र को जन्म दिया। उपस्थित महिलाओं ने चारों तरफ पर्दा लगाकर प्रसव कराया।

बीते अक्टूबर की घटना
बता दें कि रेनू की जेठानी रेशमा पत्नी हरिपाल को भी प्रसव के लिए बैलगाड़ी में अस्पताल ले जाते समय वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो चुका है। रेशमा के प्रसव के समय अस्पताल में समय न होने के कारण परिजन उसे उसके मायके सिसोलर में छोड़ आए थे।

सड़कें ध्वस्त, जीवन खतरे में
परसदवा डेरा तक पहुंचने के दो रास्ते हैं, जिनमें से दोनों गंभीर रूप से ध्वस्त हैं। भटुरी मार्ग पर जिला पंचायत द्वारा 2005 में बनाई गई सड़क अब पूरी तरह गायब हो चुकी है। दूसरी ओर, छानी से आने वाला मार्ग पूरी तरह कच्चा है और बारिश में दलदल बन जाता है। स्थानीय लोग बताते हैं कि बैलगाड़ी या ट्रैक्टर को छोड़कर कोई वाहन इन रास्तों पर नहीं चल सकता।

मूलभूत सुविधाओं की लगातार कमी
गांववासी सड़क, बिजली, पानी और शिक्षा जैसी मूलभूत सुविधाओं के लिए लंबे समय से संघर्षरत हैं। उनका कहना है कि जनप्रतिनिधि केवल चुनाव के समय वोट मांगने आते हैं और आश्वासन देकर चले जाते हैं। जनवरी में ग्रामीणों ने सड़क निर्माण को लेकर धरना और अनशन किया था, जिसके बाद सदर विधायक डॉ. मनोज कुमार प्रजापति ने आश्वासन दिया था, लेकिन अभी तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है।

इलाज के अभाव में नवजात की मौत
दूसरी घटना दो फरवरी की है। लालाराम निषाद की पत्नी मनीषा के एक माह के नवजात पुत्र की अचानक तबीयत बिगड़ गई। मनीषा बिना किसी वाहन के बच्चे को लेकर नौ किलोमीटर का पैदल सफर तय कर छानी पहुंची। वहां से साधन मिलने पर सिसोलर अस्पताल ले जाया गया। नवजात को मौदहा सीएचसी रेफर किया गया, लेकिन रास्ते में उसकी मौत हो गई। यह दंपति का पहला बच्चा था।

परसदवा डेरा की घटनाएं ग्रामीण इलाकों में सड़क और स्वास्थ्य अवसंरचना की गंभीर कमी को उजागर करती हैं। गंभीर मौसम और खराब रास्तों के कारण गर्भवती महिलाओं और नवजात शिशुओं की जान हमेशा खतरे में रहती है।

Related Story

Trending Topics

img title
img title

Be on the top of everything happening around the world.

Try Premium Service.

Subscribe Now!