हाथ टूटा, जीभ कटी… 6 साल की मासूम से दरिंदगी करने वाले हैवान को 56 दिन में फांसी—कोर्ट का सबसे सख्त और ऐतिहासिक फैसला

Edited By Anil Kapoor,Updated: 08 Jan, 2026 08:09 AM

culprit who committed heinous act against innocent child has been sentenced to

Banda News: उत्तर प्रदेश के बांदा जिले से सामने आए एक दिल दहला देने वाले मामले में अदालत ने सख्त और ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। 6 साल की मासूम बच्ची के साथ दुष्कर्म और बर्बरता करने वाले दोषी अमित रैकवार को कोर्ट ने फांसी की सजा सुनाई है। खास बात यह...

Banda News: उत्तर प्रदेश के बांदा जिले से सामने आए एक दिल दहला देने वाले मामले में अदालत ने सख्त और ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। 6 साल की मासूम बच्ची के साथ दुष्कर्म और बर्बरता करने वाले दोषी अमित रैकवार को कोर्ट ने फांसी की सजा सुनाई है। खास बात यह रही कि यह फैसला घटना के महज 56 दिनों के भीतर आ गया, जिसे तेज न्यायिक प्रक्रिया का उदाहरण माना जा रहा है। अदालत ने अपने आदेश में साफ कहा कि दोषी को तब तक फांसी पर लटकाया जाए, जब तक उसकी मौत न हो जाए। सजा सुनाए जाने के समय आरोपी के चेहरे पर कोई पछतावा नहीं दिखा, जबकि पीड़ित परिवार ने कोर्ट के फैसले पर संतोष जताया है।

गुटखा देने के बहाने बुलाया, फिर की हैवानियत
यह जघन्य वारदात 25 जुलाई 2025 को बांदा के कालिंजर थाना क्षेत्र में हुई थी। 6 साल की बच्ची घर के बाहर खेल रही थी। तभी पड़ोस में रहने वाला अमित रैकवार उसे गुटखा देने के बहाने अपने साथ ले गया। आरोपी ने बच्ची के साथ दुष्कर्म किया और जब उसने विरोध किया तो उस पर बेरहमी से हमला किया। बच्ची का हाथ तोड़ दिया गया, जीभ काट दी गई और उसके नाजुक अंगों को बुरी तरह घायल कर दिया गया। जब परिजनों ने बच्ची को तलाशा तो वह खून से लथपथ हालत में मिली।

हालत गंभीर होने पर कानपुर रेफर, अब भी पूरी तरह ठीक नहीं
घायल बच्ची को तुरंत जिला अस्पताल ले जाया गया, जहां से उसकी गंभीर हालत को देखते हुए उसे कानपुर रेफर कर दिया गया। डॉक्टरों के मुताबिक बच्ची की हालत बेहद नाजुक थी। घटना को छह महीने से ज्यादा समय बीत चुका है, लेकिन बच्ची अब भी पूरी तरह ठीक नहीं हो पाई है। परिजनों का कहना है कि बच्ची आज भी डरी-सहमी रहती है और आगे भी उसके ऑपरेशन होने हैं। इस घटना ने पूरे परिवार की जिंदगी बदल दी है।

मुठभेड़ के बाद गिरफ्तारी, पैरों में लगी गोली
घटना के कुछ ही घंटों बाद पुलिस ने आरोपी की तलाश शुरू कर दी। आरोपी मध्य प्रदेश की ओर जंगलों में भागने की कोशिश कर रहा था। इसी दौरान पुलिस से उसकी मुठभेड़ हो गई, जिसमें उसके दोनों पैरों में गोली लगी। पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर जेल भेज दिया।घटना के बाद पूरे जिले में गुस्से का माहौल था और लोग आरोपी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग कर रहे थे।

20 दिन में जांच पूरी, 56 दिन में फैसला
मामले की गंभीरता को देखते हुए विवेचना अधिकारी इंस्पेक्टर दीपेंद्र सिंह ने रिकॉर्ड समय में जांच पूरी की। पुलिस ने 20 दिनों के भीतर चार्जशीट तैयार कर 12 नवंबर को अदालत में दाखिल कर दी। ट्रायल के दौरान अभियोजन पक्ष ने 10 गवाह पेश किए। कुल 36 तारीखों में सुनवाई पूरी हुई और अदालत ने महज 56 दिनों में दोषी को फांसी की सजा सुना दी।

कोर्ट का सख्त संदेश, जुर्माना भी लगाया
अदालत ने कहा कि यह अपराध समाज की आत्मा को झकझोर देने वाला है और ऐसे मामलों में सख्त सजा जरूरी है। कोर्ट ने फांसी के साथ-साथ आरोपी पर 75 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया। खास बात यह रही कि जिस जज ने इस मामले की सुनवाई शुरू की थी, उसी जज ने अंतिम फैसला भी सुनाया। सजा सुनाने के बाद आरोपी को पुलिस टीम जेल लेकर रवाना हो गई।

मां बोलीं—मेरी बेटी की पूरी जिंदगी बर्बाद कर दी
फैसले के बाद पीड़ित बच्ची की मां ने कहा कि आरोपी ने उनकी बेटी की पूरी जिंदगी तबाह कर दी। उन्होंने बताया कि जब बच्ची मिली थी, तब उसकी सांस चल रही थी, लेकिन शरीर पर गंभीर जख्म थे। मां ने कहा कि आरोपी को यही सजा मिलनी चाहिए थी। उन्होंने अदालत और पुलिस की कार्रवाई पर संतोष जताया।

अपराधियों में जाएगा सख्त संदेश: एसपी
बांदा के एसपी पलाश बंसल ने बताया कि पुलिस ने मामले में तेजी और मजबूती से कार्रवाई की। मुठभेड़ के दौरान आरोपी की गिरफ्तारी, जल्द चार्जशीट और कोर्ट में मजबूत पैरवी की गई। एसपी ने कहा कि सरकार की मंशा ‘ऑपरेशन कन्विक्शन’ के तहत महिला और बच्चों के खिलाफ अपराधों में सख्त कार्रवाई की है। ऐसे फैसलों से अपराधियों में डर पैदा होगा और समाज को कड़ा संदेश जाएगा।

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