'सशक्त, समृद्ध और आत्मनिर्भर भारत' के निर्माण हेतु संकल्पित हों, CM Yogi का 77वें गणतंत्र दिवस पर आह्वान

Edited By Purnima Singh,Updated: 26 Jan, 2026 12:38 PM

cm yogi s call on the 77th republic day

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमवार को 77वें गणतंत्र दिवस के मौके पर सभी प्रदेशवासियों को बधाई देते हुए आह्वान किया कि वे संविधान के आदर्शों से प्रेरित होकर एक 'सशक्त, समृद्ध और आत्मनिर्भर भारत' के निर्माण हेतु संकल्पित हों। .....

लखनऊ : उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमवार को 77वें गणतंत्र दिवस के मौके पर सभी प्रदेशवासियों को बधाई देते हुए आह्वान किया कि वे संविधान के आदर्शों से प्रेरित होकर एक 'सशक्त, समृद्ध और आत्मनिर्भर भारत' के निर्माण हेतु संकल्पित हों। योगी आदित्‍यनाथ ने यहां राष्‍ट्रीय ध्‍वज फहराने के बाद अपने संबोधन में कहा, ''भारत का संविधान व्यक्ति नहीं समष्टि के भाव को जोड़ने की प्रेरणा देता है। यदि कोई व्यक्ति कहता है कि मैं न्याय से ऊपर हूं, संविधान से ऊपर हूं, व्यवस्था से ऊपर हूं तो मुझे लगता है कि वह भारत के संविधान की अवमानना कर रहा है।'' 

उन्होंने कहा कि आज का यह दिवस हम सबको भारत के महान संविधान के प्रति समर्पण के साथ आगे बढ़ने एवं संकल्‍पों को आगे बढ़ाने की नयी प्रेरणा देता है। योगी आदित्यनाथ ने कहा कि आज ही के दिन 1950 में भारत का संविधान लागू हुआ था। उन्होंने कहा, ‘‘76 वर्ष की यात्रा में इस संविधान ने अनेक उतार-चढ़ाव देखे हैं... लेकिन ''एक भारत-श्रेष्ठ भारत'' के अपने संकल्पों के अनुरूप उत्तर से दक्षिण तक, पूरब से पश्चिम तक, भारत की एकात्मकता और एकता के लक्ष्य को आगे बढ़ाते हुए हम सब एक नये भारत का दर्शन कर रहे हैं। इसमें हमारे संविधान की महत्वपूर्ण भूमिका है।'' 

योगी ने कहा, ‘‘भारत के संविधान का असली संरक्षक अगर कोई है तो भारत का नागरिक है। उस नागरिक के प्रति हर एक संस्‍था को, हर नागरिक को, हर मंत्रालय और विभागों को अपनी जवाबदेही को सुनिश्चित करना होगा। यह संविधान हमारे समर्पण के भाव को भी व्यक्त करता है।'' मुख्‍यमंत्री ने कहा कि जब भी संविधान की मूल भावनाओं का अनादर होता है तो वास्तव में भारत माता के उन सपूतों का, जिनके बल पर यह देश स्वतंत्र हुआ, उनका भी अनादर होता है। उन्होंने कहा, ''यह अनादर सिर्फ संविधान का ही नहीं, उन महान पुरुषों का भी अपमान है, जिनके बल पर यह देश स्वतंत्र हुआ। इसलिए हर नागरिक का दायित्व है कि वह संविधान के प्रति अपनी श्रद्धा और समर्पण भाव के साथ कार्य करे।'' 

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