अक्षय तृतीया 2026: सूर्य और चंद्रमा रहेंगे अपनी उच्च राशि में, इस महासंयोग में सोने की तरह चमकेगी किस्मत

Edited By Anil Kapoor,Updated: 13 Apr, 2026 10:13 AM

akshaya tritiya 2026 receive 100 times more auspicious rewards

Varanasi News: हिंदू धर्म में अबूझ मुहूर्त माने जाने वाले अक्षय तृतीया के पर्व को लेकर इस साल भक्तों में भारी उत्साह है। ज्योतिष गणना के अनुसार, इस वर्ष अक्षय तृतीया 20 अप्रैल, सोमवार को मनाई जाएगी। इस बार ग्रहों की स्थिति कुछ ऐसी है जो पिछले कई...

Varanasi News: हिंदू धर्म में अबूझ मुहूर्त माने जाने वाले अक्षय तृतीया के पर्व को लेकर इस साल भक्तों में भारी उत्साह है। ज्योतिष गणना के अनुसार, इस वर्ष अक्षय तृतीया 20 अप्रैल, सोमवार को मनाई जाएगी। इस बार ग्रहों की स्थिति कुछ ऐसी है जो पिछले कई दशकों में नहीं देखी गई, जिससे यह दिन निवेश और शुभ कार्यों के लिए महामुहूर्त बन गया है।

तिथि और शुभ समय (उदया तिथि)
पंचांग के अनुसार, अक्षय तृतीया की तिथि 19 अप्रैल को दोपहर 1:01 बजे से शुरू होगी और 20 अप्रैल को सुबह 10:39 बजे समाप्त होगी। शास्त्रों में उदया तिथि (सूर्योदय के समय की तिथि) को प्रधानता दी जाती है, इसलिए यह महापर्व 20 अप्रैल को ही मनाया जाएगा।

ग्रहों का दुर्लभ संयोग: 100 गुना बढ़ेगा पुण्य
इस बार अक्षय तृतीया पर सूर्य और चंद्रमा दोनों अपनी सबसे शक्तिशाली स्थिति में होंगे:-
- सूर्य: मेष राशि (अपनी उच्च राशि) में विराजमान रहेंगे।
- चंद्रमा: कर्क राशि (अपनी उच्च राशि) में रहेंगे।
ज्योतिषाचार्यों का मानना है कि दोनों ग्रहों की इस उच्च स्थिति के कारण इस दिन किए गए दान और पूजा का फल सामान्य से 100 गुना अधिक प्राप्त होगा।

बन रहे हैं कई राजयोग और शुभ मुहूर्त
इस वर्ष अक्षय तृतीया पर ग्रहों की चाल से कई दुर्लभ योगों का निर्माण हो रहा है:-
- राजयोग: इस दिन गजकेसरी योग और मालव्य राजयोग बन रहे हैं, जो सुख-समृद्धि के कारक हैं।
- विशिष्ट योग: सौभाग्य योग, आयुष्मान योग, गृह योग और स्थिर योग का भी अद्भुत मेल मिल रहा है।
- त्रिपुष्कर योग: इस बार त्रिपुष्कर योग और रोहिणी नक्षत्र का प्रभाव रहेगा। मान्यता है कि इस योग में किए गए कार्य का फल कभी नष्ट नहीं होता, इसीलिए इसे 'अक्षय योग' कहा जाता है।

क्या करें इस विशेष दिन?
अक्षय तृतीया का अर्थ है— जिसका क्षय (नाश) न हो। इस दिन लोग विशेष रूप से निम्नलिखित कार्य करते हैं:-
- खरीदारी: सोने-चांदी के आभूषण, वाहन या संपत्ति खरीदना अत्यंत शुभ माना जाता है।
- पूजा-पाठ: भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की विशेष आराधना की जाती है।
- दान: जल से भरे पात्र, सत्तू, पंखे और मौसमी फलों का दान करने से पितरों का आशीर्वाद मिलता है।
- नए कार्य: नया व्यापार शुरू करने या विवाह के लिए इस दिन किसी विशेष मुहूर्त देखने की आवश्यकता नहीं होती। 

Related Story

Trending Topics

img title
img title

Be on the top of everything happening around the world.

Try Premium Service.

Subscribe Now!