प्राइवेट स्कूलों के कमीशन राज पर UP Board का ताला: 2026-27 से नहीं चलेगी यह मनमानी, केवल सरकारी किताबों का होगा राज!

Edited By Anil Kapoor,Updated: 06 Apr, 2026 08:52 AM

no more arbitrary books new guidelines implemented for all schools in up

Lucknow News: उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद (UP Board) ने आगामी शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए एक बेहद सख्त और महत्वपूर्ण गाइडलाइन जारी की है। बोर्ड के नए आदेश के अनुसार, अब प्रदेश के सभी माध्यमिक स्कूलों में केवल अधिकृत (Authorized)...

Lucknow News: उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद (UP Board) ने आगामी शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए एक बेहद सख्त और महत्वपूर्ण गाइडलाइन जारी की है। बोर्ड के नए आदेश के अनुसार, अब प्रदेश के सभी माध्यमिक स्कूलों में केवल अधिकृत (Authorized) पाठ्यपुस्तकों से ही पढ़ाई कराई जाएगी। यदि कोई भी स्कूल अनधिकृत या गैर-मान्यता प्राप्त किताबों का उपयोग करता पाया गया, तो उसके खिलाफ इंटरमीडिएट शिक्षा अधिनियम के तहत कठोर दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।

प्रमुख बदलाव और अनिवार्य नियम
बोर्ड ने शिक्षा व्यवस्था में एकरूपता लाने के लिए कक्षाओं के अनुसार किताबों का निर्धारण कर दिया है:-
- कक्षा 9 और 10: अंग्रेजी, गणित और विज्ञान जैसे मुख्य विषयों के लिए केवल बोर्ड द्वारा निर्धारित अधिकृत किताबें ही मान्य होंगी।
- कक्षा 11 और 12: इंटरमीडिएट के लिए कुल 36 विषयों की अधिकृत सूची जारी की गई है।
- NCERT का दबदबा: पूरे प्रदेश में 70 NCERT पुस्तकों को अनिवार्य रूप से लागू किया गया है। इसके अलावा, बोर्ड द्वारा चयनित हिन्दी, संस्कृत और उर्दू की 12 विशेष पुस्तकें भी पाठ्यक्रम का हिस्सा रहेंगी।

अभिभावकों की जेब पर नहीं पड़ेगा बोझ
अक्सर देखा जाता है कि निजी स्कूल महंगी और कमीशन वाली किताबें खरीदने के लिए अभिभावकों पर दबाव बनाते हैं। इसे रोकने के लिए यूपी बोर्ड ने स्पष्ट किया है कि ये सभी किताबें छात्रों को सस्ती और रियायती दरों पर उपलब्ध कराई जाएंगी। किताबों की छपाई और सप्लाई के लिए 3 विशेष एजेंसियों को जिम्मेदारी दी गई है। यह नियम राजकीय (Government), सहायता प्राप्त (Aided) और निजी (Private)—सभी प्रकार के स्कूलों पर समान रूप से लागू होगा।

जागरूकता और सख्त निगरानी
छात्रों और अभिभावकों को सही किताबों की पहचान हो सके, इसके लिए स्कूलों में पुस्तक जागरूकता शिविर लगाए जाएंगे। इसके साथ ही, जिला और मंडल स्तर के शिक्षा अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे स्कूलों का औचक निरीक्षण करें। बोर्ड का संदेश साफ है कि शिक्षा के नाम पर अब व्यापार नहीं चलेगा। जो स्कूल नियमों का उल्लंघन करेंगे, उन पर भारी जुर्माना लगाने से लेकर उनकी मान्यता रद्द करने तक की कार्रवाई की जा सकती है।

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