Edited By Anil Kapoor,Updated: 10 Feb, 2026 07:32 AM

Maha Shivratri 2026 Date: सनातन धर्म में देवों के देव महादेव की आराधना का सबसे बड़ा महापर्व 'महाशिवरात्रि' आने वाला है। साल 2026 में शिव और शक्ति के मिलन का यह पावन उत्सव 15 फरवरी 2026, रविवार को पूरे देश में श्रद्धा और उल्लास के साथ......
Maha Shivratri 2026 Date: सनातन धर्म में देवों के देव महादेव की आराधना का सबसे बड़ा महापर्व 'महाशिवरात्रि' आने वाला है। साल 2026 में शिव और शक्ति के मिलन का यह पावन उत्सव 15 फरवरी 2026, रविवार को पूरे देश में श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जाएगा।धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इसी विशेष तिथि पर भगवान शिव का दिव्य प्राकट्य हुआ था और माता पार्वती के साथ उनका विवाह संपन्न हुआ था। आइए जानते हैं इस साल पूजा का शुभ समय और चार प्रहर की महिमा।
तिथि और शुभ मुहूर्त: कब रखें व्रत?
हिंदू पंचांग के अनुसार, फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि का विशेष महत्व होता है। साल 2026 के लिए गणना इस प्रकार है:
- चतुर्दशी तिथि का प्रारंभ: 15 फरवरी 2026 (रविवार) को शाम 5:04 बजे से।
- चतुर्दशी तिथि का समापन: 16 फरवरी 2026 (सोमवार) को शाम 5:34 बजे तक।
- निशीथ काल पूजा: 16 फरवरी की रात 12:09 बजे से 1:01 बजे तक (यह समय तंत्र-मंत्र और विशेष साधना के लिए सर्वश्रेष्ठ माना जाता है)।
नोट: चूंकि महाशिवरात्रि की मुख्य पूजा रात्रि के समय की जाती है, इसलिए 15 फरवरी को ही व्रत रखना और शिव अर्चना करना शास्त्र सम्मत होगा।
- चार प्रहर की पूजा का समय (15-16 फरवरी)शिवरात्रि की रात को चार प्रहरों में बांटकर पूजा करने से धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष की प्राप्ति होती है।
प्रहर समय (शुभ मुहूर्त)
प्रथम प्रहर 15 फरवरी: शाम 6:11 से रात 9:22 तक
द्वितीय प्रहर 15 फरवरी: रात 9:23 से 16 फरवरी रात 12:34 तक
तृतीय प्रहर 16 फरवरी: रात 12:35 से सुबह 3:46 तक
चतुर्थ प्रहर 16 फरवरी: सुबह 3:46 से सुबह 6:59 तक
महाशिवरात्रि की महिमा और पूजा विधि
इस दिन शिवालयों में 'हर-हर महादेव' की गूंज रहती है। भक्त सुबह स्नान के बाद शिवलिंग पर गंगाजल, कच्चा दूध, बेलपत्र, धतूरा और अक्षत अर्पित कर महादेव का आशीर्वाद लेते हैं। माना जाता है कि महाशिवरात्रि पर जागरण करने और रात्रि के चारों प्रहर में शिव स्तुति करने से जन्म-जन्मांतर के पाप मिट जाते हैं।
शिव आरती के बिना अधूरी है पूजा
महाशिवरात्रि की रात भजन-कीर्तन और आरती का विशेष फल मिलता है। भगवान शिव की सुप्रसिद्ध आरती "जय शिव ओंकारा" का गायन भक्तों के मन को शांति और शक्ति प्रदान करता है।
आरती
जय शिव ओंकारा, ऊं जय शिव ओंकारा।
ब्रह्मा, विष्णु, सदाशिव अर्द्धांगी धारा॥
एकानन, चतुरानन, पंचानन राजे।
हंसासन, गरुड़ासन, वृषवाहन साजे॥
दो भुज, चार चतुर्भुज, दस भुज अति सोहे।
त्रिगुण रूप निरखते त्रिभुवन जन मोहे॥
अक्षमाला, वनमाला, रुण्डमाला धारी।
माथे चंदन, भाले पर शोभे शशिधारी॥
कर में त्रिशूल और डमरू की शोभा निराली।
जग के पालनहार, हरते दुख की लाली॥