ईद-उल-फितर पर UP Police अलर्ट: इस जिले में सख्त सुरक्षा प्रबंध, 460 ईदगाह, 1865 मस्जिदों में नमाज, 5 हजार पुलिसकर्मी तैनात

Edited By Purnima Singh,Updated: 17 Mar, 2026 04:51 PM

police on alert ahead of eid

आगामी ईद-उल-फितर पर्व को सकुशल एवं शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराने के लिए मेरठ परिक्षेत्र में व्यापक सुरक्षा व्यवस्था की गई है। पुलिस के अनुसार रेंज के चारों जनपदों में कुल 460 ईदगाह और 1865 मस्जिदों में नमाज अदा की जाएगी, जिनकी सुरक्षा के लिए करीब...

मेरठ : आगामी ईद-उल-फितर पर्व को सकुशल एवं शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराने के लिए मेरठ परिक्षेत्र में व्यापक सुरक्षा व्यवस्था की गई है। पुलिस के अनुसार रेंज के चारों जनपदों में कुल 460 ईदगाह और 1865 मस्जिदों में नमाज अदा की जाएगी, जिनकी सुरक्षा के लिए करीब पांच हजार पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया है। पुलिस अधिकारियों ने मंगलवार को बताया कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पूरे परिक्षेत्र को 23 जोन और 79 सेक्टर में विभाजित किया गया है, जबकि त्वरित कार्रवाई के लिए 66 क्यूआरटी (त्वरित प्रतिक्रिया दल) गठित की गई हैं।

अधिकारियों ने बताया कि इसके अलावा 208 स्थानों को संवेदनशील के रूप में चिन्हित करके वहां विशेष सतर्कता बरती जा रही है। आधिकारिक जानकारी के अनुसार मेरठ में 158 ईदगाह और 544 मस्जिदों, बुलंदशहर में 150 ईदगाह और 414 मस्जिदों, बागपत में 68 ईदगाह और 451 मस्जिदों तथा हापुड़ में 84 ईदगाह और 456 मस्जिदों में नमाज अदा की जाएगी। आधिकारिक जानकारी के अनुसार सुरक्षा व्यवस्था के तहत छह अपर पुलिस अधीक्षक, 22 क्षेत्राधिकारी, 95 निरीक्षक, 805 उपनिरीक्षक, 1100 मुख्य आरक्षी, 1360 आरक्षी, 1090 होमगार्ड/पीआरडी जवान तथा तीन कंपनी पीएसी की ड्यूटी लगाई गई है।

पुलिस महानिरीक्षक (डीआईजी) मेरठ रेंज कलानिधि नैथानी ने सभी जनपद प्रभारियों को निर्देश दिए हैं कि किसी भी नई परंपरा की अनुमति न दी जाए और असामाजिक व साम्प्रदायिक तत्वों पर कड़ी नजर रखी जाए। उन्होंने संवेदनशील और मिश्रित आबादी वाले क्षेत्रों में ड्रोन कैमरों से निगरानी और पैदल गश्त बढ़ाने के निर्देश भी दिए हैं। पुलिस ने सोशल मीडिया पर भड़काऊ या आपत्तिजनक पोस्ट करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की चेतावनी दी है। साथ ही बाजारों, मॉल और भीड़भाड़ वाले इलाकों में विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश जारी किए गए हैं। प्रशासन द्वारा शांति समिति, धर्मगुरुओं और स्थानीय लोगों के साथ बैठकें करके समन्वय स्थापित किया गया है, ताकि त्योहार को पारंपरिक और सौहार्दपूर्ण वातावरण में संपन्न कराया जा सके। 

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