Edited By Ramkesh,Updated: 11 Mar, 2026 08:39 PM

मोहन भागवत ने हाल ही में जगद्गुरु स्वामी सतिशाचार्य जी महाराज से मुलाकात की। यह भेंट राष्ट्र निर्माण, सांस्कृतिक पुनर्जागरण और विकसित भारत के संकल्प को लेकर महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
लखनऊ: मोहन भागवत ने हाल ही में जगद्गुरु स्वामी सतिशाचार्य जी महाराज से मुलाकात की। यह भेंट राष्ट्र निर्माण, सांस्कृतिक पुनर्जागरण और विकसित भारत के संकल्प को लेकर महत्वपूर्ण मानी जा रही है। आश्रम परिसर में उनके आगमन के दौरान वैदिक मंत्रोच्चार और पारंपरिक तरीके से स्वागत किया गया। इस अवसर पर संत-महात्मा, शिक्षाविद और सामाजिक क्षेत्र से जुड़े कई लोग मौजूद रहे।
विकसित भारत 2047 पर चर्चा
बैठक के दौरान वर्ष 2047 तक भारत को विश्व की अग्रणी शक्ति बनाने के लक्ष्य पर विस्तृत चर्चा की गई। स्वामी सतिशाचार्य ने कहा कि विकसित भारत का अर्थ केवल आर्थिक उन्नति नहीं बल्कि आध्यात्मिक चेतना, सांस्कृतिक गौरव और नैतिक मूल्यों से समृद्ध समाज का निर्माण भी है। उन्होंने अपने संरक्षण में संचालित शिक्षण संस्थानों, निःशुल्क विद्यालयों, गौसंवर्धन केंद्रों और सामाजिक अभियानों के माध्यम से समाज में मूल्यों को मजबूत करने के प्रयासों का भी उल्लेख किया।

संगठित समाज पर जोर
इस दौरान राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत ने कहा कि संगठित समाज ही मजबूत राष्ट्र की आधारशिला है। उन्होंने भारतीय संस्कृति, परिवार व्यवस्था और स्वदेशी विचार को सुदृढ़ करने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने यह भी कहा कि भारत का पुनरुत्थान उसकी सांस्कृतिक जड़ों में निहित है और सामाजिक समरसता को मजबूत बनाना समय की आवश्यकता है।

युवा शक्ति को बताया राष्ट्रनिर्माण की धुरी
बैठक में युवाओं की भूमिका पर भी विशेष जोर दिया गया। दोनों नेताओं ने शिक्षा, कौशल विकास और चरित्र निर्माण को राष्ट्र निर्माण के लिए महत्वपूर्ण बताया। कार्यक्रम के अंत में राष्ट्र की प्रगति, सामाजिक समरसता और वैश्विक शांति के लिए सामूहिक प्रार्थना की गई। उपस्थित लोगों ने इसे आध्यात्मिक नेतृत्व और संगठनात्मक शक्ति के समन्वय का महत्वपूर्ण अवसर बताया।