कान्हा की नगरी में होली का उल्लास: गोकुल में छड़ीमार होली, हुरियारों पर बरसीं प्रेम पगी छड़ियां, रंगों में सराबोर होकर झूमे श्रद्धालु

Edited By Purnima Singh,Updated: 01 Mar, 2026 05:34 PM

lathimar holi in gokul

उत्तर प्रदेश के मथुरा जिले में बरसाना और नन्दगांव की लट्ठमार होली के बाद भी ब्रज में होली का उल्लास कुछ कम नहीं हुआ है। प्राचीन परंपरा के अनुसार रविवार को गोकुल की ग्वालिनों ने कान्हा स्वरूप हुरियारों पर प्रेमपगी छड़ियां बरसाईं। जिला प्रशासन के...

मथुरा : उत्तर प्रदेश के मथुरा जिले में बरसाना और नन्दगांव की लट्ठमार होली के बाद भी ब्रज में होली का उल्लास कुछ कम नहीं हुआ है। प्राचीन परंपरा के अनुसार रविवार को गोकुल की ग्वालिनों ने कान्हा स्वरूप हुरियारों पर प्रेमपगी छड़ियां बरसाईं। जिला प्रशासन के सूत्रों ने यहां बताया कि छड़ीमार होली की शुरुआत सुबह 10 बजे नंद भवन नन्दकिला से ठाकुरजी का डोला (शोभायात्रा) निकालने से हुई जिसके बाद यह डोला नन्द चौक से होकर मुरलीधर घाट पर पहुंचा।        

उन्होंने बताया कि मंदिर के सेवायत पुजारी मथुरा दास ने ठाकुरजी की आरती उतारी और गोकुल वासियों ने गली-गली में डोले का फूलों की बारिश कर स्वागत किया। सूत्रों ने बताया कि डोले के साथ गोकुलवासी मस्त होकर नाचते-गाते चल रहे थे और गोकुल की ग्वालिनें भी छड़ी लेकर डोले के साथ-साथ चल रहीं थीं। उन्होंने बताया कि इस बीच, ग्वाल-बालों ने ग्वालिनों से हंसी ठिठोली शुरु की तो पहले तो ग्वालिनों ने उन्हें समझाया, और जब वे नहीं माने तो मुरलीधर घाट पहुंचते-पहुंचते छड़ियों की मार की बरसात शुरू कर दी। 

स्थानीय लोगों के मुताबिक यह वही जगह थी जहां कभी (द्वापर युग में) भगवान श्रीकृष्ण ने भी अपने सखाओं के साथ मिलकर ग्वालिनों से होली खेली थी। सूत्रों ने बताया कि छड़ीमार होली के दौरान हर तरफ अबीर और गुलाल की बरसात होती रही तथा हुरियार ही नहीं, श्रद्धालु भी टेसू के फूलों से बने रंग से तरबतर हो आनन्द लेते रहे। सूत्रों ने बताया कि इस 'प्यार भरी मार' की होली को देखने के लिए देश-विदेश से बड़ी संख्या में श्रद्धालु गोकुल पहुंचे थे। उन्होंने बताया कि इस दौरान सुरक्षा के पुख्ता बंदोबस्त किए गए थे। 

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