Edited By Ramkesh,Updated: 01 Apr, 2026 08:50 PM

उत्तर प्रदेश कैडर के 2023 बैच के आईएएस अधिकारी रिंकू सिंह राही ने सेवा से 'तकनीकी' रूप से इस्तीफा देने के बाद लंबे समय से काम न मिलने का हवाला देते हुए उन्हें मूल सेवा प्रांतीय लोक सेवा (पीसीए) संवर्ग में भेजे जाने की मांग की है। वहीं, अलीगढ़ में...
लखनऊ: उत्तर प्रदेश कैडर के 2023 बैच के आईएएस अधिकारी रिंकू सिंह राही ने सेवा से 'तकनीकी' रूप से इस्तीफा देने के बाद लंबे समय से काम न मिलने का हवाला देते हुए उन्हें मूल सेवा प्रांतीय लोक सेवा (पीसीए) संवर्ग में भेजे जाने की मांग की है। वहीं, अलीगढ़ में राही के परिवार के लोगों ने बुधवार को उन्हें एक 'सार्थक दायित्व' दिए जाने की भावुक अपील की है। इस्तीफा देने से पहले लखनऊ में राजस्व परिषद से सम्बद्ध रहे रिंकू सिंह राही ने राष्ट्रपति को पत्र लिखकर पीसीएस संवर्ग में वापस भेजे जाने का अनुरोध किया है।
उन्होंने कहा है कि पिछले लगभग आठ महीने से उनके पास कोई निर्धारित दायित्व नहीं है। राष्ट्रपति को पिछले महीने 26 मार्च को लिखे अपने पत्र में राही ने आईएएस से 'तकनीकी रूप से इस्तीफा' देने की अनुमति मांगी है। राही ने एक नैतिक दुविधा को इसका कारण बताया बताते हुए कहा है कि बिना किसी ठोस जिम्मेदारी के सिर्फ वेतन और भत्ते लेते हुए सेवा में बने रहना उन्हें उचित नहीं लगता।
उन्होंने कहा कि संवैधानिक मूल्यों के प्रति उनकी निष्ठा और काम करने का उनका जवाबदेही के प्रति केंद्रित तरीका मौजूदा प्रशासनिक व्यवस्था में उन्हें 'अनुपयुक्त' महसूस कराता है। राही ने 'पीटीआई-भाषा' से बातचीत में कहा कि उनके इस कदम को सरकारी सेवा छोड़ने की कोशिश के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए। उन्होंने जोर देकर कहा कि यह सिर्फ एक प्रक्रियागत कदम है।
राही ने कहा, ''मैं प्रशासनिक व्यवस्था को छोड़ने की बात नहीं कर रहा हूं। यह सिर्फ एक तकनीकी त्यागपत्र है। मैं संवैधानिक व्यवस्था को अच्छा मानता हूं। अगर इसमें कुछ कमियां हैं तो उन्हें सुधारा जा सकता है।'' राही ने निजी परेशानी या उत्पीड़न की बातों को भी खारिज करते हुए कहा, ''मुझे कोई निजी समस्या नहीं है। मुझे निजी तौर पर परेशान नहीं किया जा रहा है और ना ही मैं अवसाद में हूं। मैं पहले ही सबसे बुरे हालात का सामना कर चुका हूं।'' अपने फैसले के परिवार पर पड़ने वाले असर के बारे में अधिकारी ने कहा कि उनके करीबी लोग इस कदम को लेकर चिंतित नहीं हैं।
उन्होंने कहा, ''मेरे परिवार के सदस्य और मेरे करीबी लोग चिंतित नहीं हैं क्योंकि वे जानते हैं कि मैं वही इंसान हूं, जिसने इससे भी बुरे हालात का सामना किया है।'' राही ने बताया कि सिविल सेवा परीक्षा 2023 के जरिए आईएएस में चुने जाने, मसूरी में प्रशिक्षण पूरा करने और उसके बाद मथुरा में प्रशिक्षण लेने के बाद जुलाई 2025 में उन्हें शाहजहांपुर में संयुक्त मजिस्ट्रेट के पद पर तैनात किया गया था। उन्होंने दावा किया कि पारदर्शिता को बढ़ावा देने और कथित अनियमितताओं को दूर करने के लिए उनके द्वारा उठाए गए कदमों का विरोध किया गया, जिसके चलते उन्हें सक्रिय दायित्वों से दूर कर दिया गया।
राही ने यह आरोप भी लगाया कि वित्तीय अनियमितताओं को उजागर करने के उनके पिछले प्रयासों के कारण उनकी जान को खतरा पैदा हो गया था और उन पर जानलेवा हमला भी हुआ था लेकिन इसे लेकर की गईं शिकायतों पर कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई। उन्होंने बताया कि उन्होंने 2009 में राज्य सिविल सेवा परीक्षा और 2023 में संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) परीक्षा पास की थी। राही ने कहा कि वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा काम सौंपे जाने का आश्वासन दिए जाने के बावजूद उन्हें कोई ठोस जिम्मेदारी नहीं दी गई है, जिससे उनकी सेवा के इस महत्वपूर्ण चरण में उनके पेशेवर विकास पर बुरा असर पड़ रहा है।
पीसीएस अधिकारी के तौर पर राही का पिछला कार्यकाल भी विवादों में रहा था, जब उन्होंने समाज कल्याण विभाग में अपनी तैनाती के दौरान कल्याणकारी योजनाओं में कथित अनियमितताओं को उजागर किया था। इसके बाद उन पर जान से मारने की नीयत से हमला भी हुआ था जिसमें उन्हें गंभीर चोटें आईं। राही ने यह दावा भी किया है कि अपनी शिकायतों के बाद उन्हें दबाव और उत्पीड़न का सामना करना पड़ा था।
राही को आईएएस अधिकारी बनने के बाद जुलाई 2025 में उन्हें कुछ समय के लिए शाहजहांपुर में संयुक्त मजिस्ट्रेट के रूप में तैनात किया गया था, जहां कचहरी में एक मुंशी को खुले में शौच करने से मना करने और उठक-बैठक लगवाने का विरोध किये जाने पर उन्होंने वकीलों के सामने खुद भी उठक-बैठक की थी, जिसे लेकर वह एक बार सुर्खियों में आए थे। कुछ ही दिन में उन्हें राजस्व परिषद में स्थानांतरित कर दिया गया। इस बीच, अलीगढ़ में राही के पिता सौदान सिंह और चाचा रघुवीर सिंह ने बुधवार को अधिकारियों से आग्रह किया कि वह उनकी स्थिति पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करें।
राही के पिता ने कहा कि उनके बेटे ने इस्तीफा नहीं दिया है बल्कि उचित माध्यमों से न्याय की मांग कर रहे हैं। अलीगढ़ के गांधी पार्क क्षेत्र में स्थित अपने आवास पर संवाददाताओं से बातचीत में परिवार के सदस्यों ने उन्हें ईमानदार और समर्पित अधिकारी बताया। रघुवीर सिंह ने कहा, ''रिंकू सिंह राही ने सिर्फ यह अनुरोध किया है कि उन्हें दरकिनार किये जाने के बजाय गरिमा के साथ सेवा करने का अवसर दिया जाए।'' परिवार ने मुजफ्फरनगर में जिला समाज कल्याण अधिकारी के रूप में राही की पिछली भूमिका का भी जिक्र किया, जहां उन्होंने कथित तौर पर 100 करोड़ रुपये से अधिक के एक घोटाले का पर्दाफाश किया था। राही के पिता सौदान सिंह ने अधिकारियों से अपील की कि उन्हें उनकी गरिमा के अनुरूप कार्य सौंपा जाए। उन्होंने कहा, ''मेरे बेटे को ईमानदारी से अपना कर्तव्य निभाने का एक मौका दें।