Edited By Purnima Singh,Updated: 28 Mar, 2026 01:40 PM

भागदौड़ भरी नौकरी और घंटों कुर्सी से चिपके रहने की आदत अब सिर्फ थकान ही नहीं, बल्कि गंभीर बीमारियों की वजह बनती जा रही है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि शहरी और ऑफिस लाइफस्टाइल के चलते फैटी लिवर के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं, जो आगे चलकर गंभीर...
UP Desk : भागदौड़ भरी नौकरी और घंटों कुर्सी से चिपके रहने की आदत अब सिर्फ थकान ही नहीं, बल्कि गंभीर बीमारियों की वजह बनती जा रही है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि शहरी और ऑफिस लाइफस्टाइल के चलते फैटी लिवर के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं, जो आगे चलकर गंभीर लिवर रोगों में बदल सकते हैं।
डॉक्टरों के अनुसार, नॉन-अल्कोहोलिक फैटी लिवर डिजीज (NAFLD) भारत में तेजी से फैलने वाली आम बीमारियों में शामिल हो चुकी है। यह समस्या अचानक नहीं होती, बल्कि रोजमर्रा की गलत आदतों के कारण धीरे-धीरे विकसित होती है। लिवर शरीर का अहम अंग है, जो पोषक तत्वों को प्रोसेस करने, विषैले तत्वों को बाहर निकालने और ब्लड शुगर को नियंत्रित रखने का काम करता है। लेकिन जब शरीर में अतिरिक्त फैट और शुगर जमा होने लगते हैं, तो इसका असर सीधे लिवर पर पड़ता है।
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विशेषज्ञों का कहना है कि ऑफिस में लंबे समय तक बैठे रहना, बाहर का तला-भुना और प्रोसेस्ड खाना, ज्यादा चाय-कॉफी या मीठे पेय पदार्थों का सेवन, पर्याप्त नींद न लेना और लगातार तनाव में रहना-ये सभी आदतें लिवर के लिए खतरनाक साबित हो रही हैं। इन वजहों से मेटाबॉलिज्म धीमा हो जाता है और लिवर में फैट जमा होने लगता है, जो समय के साथ सूजन और गंभीर बीमारी का रूप ले सकता है।
फैटी लिवर की शुरुआत में अक्सर कोई स्पष्ट लक्षण दिखाई नहीं देते, लेकिन कुछ संकेतों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। जैसे-लगातार थकान रहना, पेट के ऊपरी हिस्से में भारीपन महसूस होना, वजन बढ़ना और भूख में कमी आना। ये शुरुआती चेतावनी हो सकते हैं कि लिवर प्रभावित हो रहा है।
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डॉक्टरों का मानना है कि इस बीमारी से बचाव संभव है, बशर्ते समय रहते जीवनशैली में सुधार किया जाए। रोजाना कुछ देर टहलना, लंबे समय तक एक जगह बैठने से बचना, घर का बना संतुलित भोजन करना, पर्याप्त पानी पीना और 7–8 घंटे की नींद लेना बेहद जरूरी है। साथ ही तनाव को नियंत्रित रखना भी लिवर को स्वस्थ बनाए रखने में अहम भूमिका निभाता है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सलाह है कि छोटी-छोटी आदतों में बदलाव कर फैटी लिवर जैसी समस्या से बचा जा सकता है, क्योंकि जब तक लक्षण गंभीर नहीं होते, तब तक यह बीमारी चुपचाप शरीर को नुकसान पहुंचाती रहती है।