Edited By Anil Kapoor,Updated: 27 Feb, 2026 01:03 PM

Prayagraj News: उत्तर प्रदेश की न्याय प्रणाली से एक ऐसा मामला सामने आया है जिसे सुनकर किसी की भी आंखें नम हो जाएं। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने करीब 23 साल से जेल में बंद रईस नाम के व्यक्ति को सामूहिक हत्याकांड के आरोपों से बरी कर दिया है। अदालत ने इसे...
Prayagraj News: उत्तर प्रदेश की न्याय प्रणाली से एक ऐसा मामला सामने आया है जिसे सुनकर किसी की भी आंखें नम हो जाएं। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने करीब 23 साल से जेल में बंद रईस नाम के व्यक्ति को सामूहिक हत्याकांड के आरोपों से बरी कर दिया है। अदालत ने इसे भारतीय न्यायिक ढांचे के लिए एक दुखद टिप्पणी करार दिया है, जहाँ एक निर्दोष व्यक्ति के जीवन के दो दशक से ज्यादा का समय सलाखों के पीछे कट गया।
क्या था मामला?
मिली जानकारी के मुताबिक, घटना 29-30 अगस्त 2003 की रात की है। आरोप लगा था कि रईस ने घरेलू विवाद के चलते चाकू से अपनी पत्नी और 3 मासूम बच्चों की हत्या कर दी। मृतका के चाचा की शिकायत पर एफआईआर दर्ज हुई और निचली अदालत ने साक्ष्यों के आधार पर रईस को उम्रकैद की सजा सुना दी। रईस तब से ही जेल में बंद था।
बेटे की गवाही ने पलटा पूरा केस
हाईकोर्ट में अपील के दौरान जब केस की परतें खुलीं, तो चौंकाने वाले सच सामने आए। घटना के समय रईस का बेटा अजीम महज 5 साल का था। अब 28 साल के हो चुके अजीम ने अदालत में स्वीकार किया कि उस समय शिकायतकर्ता (चाचा) और सरकारी वकील ने उसे धमकाया था। बेटे ने बताया कि उसे डराया गया था कि अगर उसने पिता के खिलाफ बयान नहीं दिया, तो उसे घर से निकाल दिया जाएगा। अदालत ने पाया कि शिकायतकर्ता और आरोपी रईस के बीच जमीन का विवाद चल रहा था, जिससे पूरे मामले को साजिश की तरफ मोड़ने का संदेह पैदा हुआ।
मेडिकल रिपोर्ट ने खोली सिस्टम की पोल
अदालत ने वैज्ञानिक साक्ष्यों में भी भारी अंतर पाया। अभियोजन पक्ष ने दावा किया था कि हत्या चाकू से हुई है, जबकि पोस्टमार्टम रिपोर्ट के अनुसार चोटें किसी भारी धारदार हथियार की थीं। जस्टिस सिद्धार्थ और जस्टिस जय कृष्ण उपाध्याय की खंडपीठ ने कहा कि अभियोजन पक्ष अपना केस साबित करने में पूरी तरह विफल रहा है।
रिहाई तो मिली, पर अब क्या?
फैसला सुनाते हुए जजों ने बहुत ही मार्मिक बात कही। उन्होंने कहा कि 23 साल जेल में रहने के बाद रईस जब बाहर आएगा, तो उसके सामने आजादी से ज्यादा सवाल होंगे। जिस पत्नी और बच्चों की हत्या का उस पर कलंक था, वे अब इस दुनिया में नहीं हैं। यह देखना भी दर्दनाक होगा कि उसका जीवित पुत्र उसे अपनाता है या नहीं।
न्यायिक सुधार की मांग
हाईकोर्ट ने इस प्रकरण को देश की आपराधिक न्याय प्रणाली पर एक काला धब्बा बताया। अदालत ने जोर देकर कहा कि न्यायिक ढांचे में बुनियादी सुधार अब समय की मांग है, ताकि किसी और 'रईस' की जिंदगी इस तरह जेल में न गल जाए।