20 दिन बाद पुलिस कस्टडी से बाहर आई 12 करोड़ की लैम्बोर्गिनी, 8.83 करोड़ का भरा बॉन्ड, पर मालिक के लिए....

Edited By Anil Kapoor,Updated: 28 Feb, 2026 09:08 AM

kanpur news 12 crore lamborghini released from police custody after 20 days

Kanpur News: कानपुर के सबसे हाई-प्रोफाइल कानूनी मामलों में से एक, 12 करोड़ रुपये की लग्जरी लैम्बोर्गिनी कार को आखिरकार कोर्ट से हरी झंडी मिल गई है। कानपुर नगर की चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट (CJM) कोर्ट ने करीब 20 दिनों की जब्ती के बाद कार को उसके...

Kanpur News: कानपुर के सबसे हाई-प्रोफाइल कानूनी मामलों में से एक, 12 करोड़ रुपये की लग्जरी लैम्बोर्गिनी कार को आखिरकार कोर्ट से हरी झंडी मिल गई है। कानपुर नगर की चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट (CJM) कोर्ट ने करीब 20 दिनों की जब्ती के बाद कार को उसके मालिक को सौंपने का आदेश जारी कर दिया। हालांकि, यह आजादी भारी-भरकम रकम और कड़ी शर्तों के साथ आई है।

8.83 करोड़ का बॉन्ड और कानूनी अड़चनें
इस सुपरकार को छुड़ाने के लिए मालिक को 8.83 करोड़ रुपए का भारी-भरकम सिक्योरिटी बॉन्ड भरना पड़ा। दिलचस्प बात यह है कि इस केस की संवेदनशीलता को देखते हुए, CJM कोर्ट तक पहुँचने से पहले दो अन्य अदालतों ने खुद को इस मामले की सुनवाई से अलग कर लिया था।

ना बेच सकेंगे, ना बदल सकेंगे रंग-रूप
CJM कोर्ट ने कार रिलीज करते समय मालिक पर कई कड़े प्रतिबंध लगाए हैं। मालिक इस सुपरकार को किसी भी व्यक्ति को बेच नहीं सकता।  गाड़ी का मालिकाना हक किसी और को ट्रांसफर नहीं किया जा सकता और न ही इसके मूल स्वरूप में कोई बदलाव (Modification) कराया जा सकता है। कार के इंजन या चेचिस नंबर के साथ किसी भी तरह की छेड़छाड़ करना कानूनी अपराध माना जाएगा। जांच या ट्रायल के दौरान जब भी पुलिस या कोर्ट को जरूरत होगी, मालिक को गाड़ी पेश करनी होगी।

क्यों जब्त हुई थी 12 करोड़ की कार?
यह पूरा मामला कानपुर के रावतपुर थाना क्षेत्र का है, जहां एक सड़क हादसे के बाद पुलिस ने इस लग्जरी कार को अपने कब्जे में ले लिया था। पुलिस ने कार का तकनीकी और मैकेनिकल मुआयना (Technical and Mechanical Inspection) करने के बाद अपनी रिपोर्ट कोर्ट में पेश की।

कोर्ट का फैसला: क्यों दी राहत?
सुनवाई के दौरान अदालत ने माना कि गाड़ी की आवश्यक जांच पूरी हो चुकी है। कोर्ट ने टिप्पणी की कि किसी वाहन को लंबे समय तक पुलिस थाने में खड़ा रखने से उसकी कीमत घटती है (Depreciation) और डैमेज होने का खतरा रहता है। इसी आधार पर कोर्ट ने सभी कानूनी औपचारिकताएं पूरी होने के बाद कार को रिलीज करने का फैसला सुनाया।

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