अमेठी की पूर्व नगर पंचायत अध्यक्ष भेजी गई जेल, अदालत के आदेश हुआ एक्शन, जानिए क्या था आरोप

Edited By Ramkesh,Updated: 27 Mar, 2026 06:42 PM

former nagar panchayat president of amethi sent to jail action taken on court o

उत्तर प्रदेश के सुलतानपुर जिले की एक अदालत के आदेश पर धोखाधड़ी के मामले में अमेठी की पूर्व नगर पंचायत अध्यक्ष एवं जिला पंचायत अध्यक्ष राजेश अग्रहरि (राजेश मसाला) की पत्नी चंद्रमा देवी को न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया। इस मामले की अगली सुनवाई...

सुलतानपुर: उत्तर प्रदेश के सुलतानपुर जिले की एक अदालत के आदेश पर धोखाधड़ी के मामले में अमेठी की पूर्व नगर पंचायत अध्यक्ष एवं जिला पंचायत अध्यक्ष राजेश अग्रहरि (राजेश मसाला) की पत्नी चंद्रमा देवी को न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया। इस मामले की अगली सुनवाई 30 मार्च को निर्धारित की गई है।

प्रभारी जिला न्यायाधीश राकेश पांडेय की अदालत ने चंद्रमा देवी की अंतरिम जमानत याचिका खारिज कर दी, जिसके बाद उन्हें जेल भेज दिया गया। इससे पहले, उन्होंने उच्च न्यायालय के निर्देश पर बृहस्पतिवार को एसीजेएम (चतुर्थ) भव्या श्रीवास्तव की अदालत में आत्मसमर्पण किया था, जहां उनकी जमानत अर्जी पहले ही खारिज हो चुकी थी।

सुनवाई के दौरान चंद्रमा देवी के अधिवक्ता अरविंद सिंह राजा ने जमानत की मांग की, जबकि परिवादी घनश्याम सोनी के अधिवक्ता अजीजुर्रहमान और डीजीसी (क्रिमिनल) राम अचल मिश्र ने इसका विरोध किया। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने अंतरिम जमानत अर्जी खारिज करते हुए नियमित जमानत पर सुनवाई के लिए 30 मार्च की तारीख तय की। इस बीच, चंद्रमा देवी के वकील ने उनकी खराब तबीयत का हवाला देते हुए इलाज की मांग की, जिसके बाद उन्हें बृहस्पतिवार रात ही जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया।

जिला अस्पताल के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. आर.के. मिश्रा ने इसकी पुष्टि की है। यह मामला अमेठी के उद्योग व्यापार मंडल के नगर अध्यक्ष घनश्याम सोनी द्वारा दायर परिवाद से जुड़ा है। आरोप है कि नगर पंचायत अध्यक्ष रहते हुए चंद्रमा देवी ने कथित रूप से धोखाधड़ी कर वादी का मकान लल्लू प्रसाद सोनी, लालजी सोनी, पुजारी लाल सोनी और संगम लाल सोनी के नाम दर्ज करा दिया।

अदालत ने आठ फरवरी 2024 को इस मामले में सभी आरोपितों को तलब किया था। परिवाद धारा 156/3 के तहत दायर किया गया है, जिसमें चंद्रमा देवी सहित पांच लोगों को आरोपी बनाया गया है। बचाव पक्ष का कहना है कि संबंधित प्रमाण पत्र अध्यक्ष द्वारा नहीं, बल्कि अधिशासी अधिकारी द्वारा जारी किया जाता है, और चंद्रमा देवी को राजनीतिक द्वेष के चलते फंसाया गया है। वहीं, वादी पक्ष ने आरोपों को गंभीर बताते हुए कार्रवाई की मांग की है।

 

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