Edited By Purnima Singh,Updated: 27 Mar, 2026 04:17 PM

पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव का असर अब आम लोगों की रसोई तक पहुंचने की आशंका जताई जा रही है। इसी को देखते हुए उत्तर प्रदेश सरकार ने संभावित एलपीजी संकट से निपटने के लिए पहले ही तैयारियां तेज कर दी हैं। सरकार ने वैकल्पिक ईंधन के तौर पर जलावन लकड़ी की...
लखनऊ : पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव का असर अब आम लोगों की रसोई तक पहुंचने की आशंका जताई जा रही है। इसी को देखते हुए उत्तर प्रदेश सरकार ने संभावित एलपीजी संकट से निपटने के लिए पहले ही तैयारियां तेज कर दी हैं। सरकार ने वैकल्पिक ईंधन के तौर पर जलावन लकड़ी की व्यवस्था को सक्रिय करने का फैसला लिया है, ताकि किसी भी आपात स्थिति में आम जनता को परेशानी न हो।
6 से 7 रुपये प्रति किलो में मिलेगी लकड़ी
प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में स्थित उत्तर प्रदेश वन निगम के 62 डिपो में फिलहाल करीब 12 हजार घन मीटर जलावन लकड़ी का भंडार मौजूद है। ये डिपो पूर्वांचल, पश्चिमी यूपी, तराई, बुंदेलखंड और अवध क्षेत्र में फैले हुए हैं। योजना के तहत जरूरतमंद लोगों को यह लकड़ी 6 से 7 रुपये प्रति किलो की दर से उपलब्ध कराई जाएगी, जिससे रसोई ईंधन का सस्ता विकल्प मिल सके।
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एक महीने में मिलेगी सिर्फ 10 क्विंटल लकड़ी
सरकार ने वितरण प्रणाली को पारदर्शी और नियंत्रित बनाए रखने के लिए सख्त नियम भी तय किए हैं। किसी भी व्यक्ति को एक महीने में अधिकतम 10 क्विंटल लकड़ी ही दी जाएगी। इसके लिए आधार कार्ड की कॉपी और मोबाइल नंबर देना अनिवार्य होगा, ताकि जमाखोरी और कालाबाजारी पर रोक लगाई जा सके।
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एहतियातन की जा रही तैयारी
वन निगम के अधिकारियों का कहना है कि यह पूरी तैयारी एहतियात के तौर पर की जा रही है। अगर गैस की आपूर्ति बाधित होती है या कीमतों में अचानक उछाल आता है, तो लोगों को तत्काल वैकल्पिक व्यवस्था उपलब्ध कराई जा सकेगी। इसके अलावा, जरूरत पड़ने पर लकड़ी का स्टॉक बढ़ाने और अन्य श्रेणी की लकड़ी को भी जलावन में इस्तेमाल करने की योजना पर काम किया जा रहा है। सरकार का मानना है कि समय रहते की गई ये तैयारी किसी भी संभावित संकट के दौरान आम जनता को राहत देने में अहम साबित होगी।