महोबा में अनोखी विदाई: 35 साल की नौकरी के बाद दूल्हा बने रघुवीर सिंह, ढोल-नगाड़ों के साथ पहुंचे घर

Edited By Anil Kapoor,Updated: 02 Mar, 2026 01:51 PM

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Mahoba News: उत्तर प्रदेश के बुंदेलखंड इलाके से विदाई की एक ऐसी तस्वीर सामने आई है, जिसने सोशल मीडिया पर सबका दिल जीत लिया है। आमतौर पर रिटायरमेंट के वक्त माहौल भावुक होता है और आंखों में आंसू होते हैं, लेकिन महोबा के बेसिक शिक्षा विभाग में नजारा...

Mahoba News: उत्तर प्रदेश के बुंदेलखंड इलाके से विदाई की एक ऐसी तस्वीर सामने आई है, जिसने सोशल मीडिया पर सबका दिल जीत लिया है। आमतौर पर रिटायरमेंट के वक्त माहौल भावुक होता है और आंखों में आंसू होते हैं, लेकिन महोबा के बेसिक शिक्षा विभाग में नजारा बिल्कुल उलट था। जहां एक वरिष्ठ लिपिक (बाबू जी) की विदाई किसी शाही शादी के जश्न जैसी नजर आई।

35 साल का सफर और दूल्हे वाली विदाई
बेसिक शिक्षा विभाग में तैनात वरिष्ठ लिपिक रघुवीर सिंह तोमर ने विभाग को अपने जीवन के 35 अनमोल साल दिए। जब उनके रिटायरमेंट का दिन आया, तो उनके साथी कर्मचारियों ने इसे यादगार बनाने के लिए एक अनोखी योजना बनाई। रघुवीर सिंह को फूलों से लदी घोड़ी पर बैठाया गया, बिल्कुल वैसे ही जैसे एक दूल्हा अपनी बारात में निकलता है।

डीजे की धुन और गुलाल की होली
विदाई का यह जुलूस महोबा की सड़कों पर चर्चा का विषय बन गया। ढोल-नगाड़ों की थाप और डीजे की धुन पर साथी कर्मचारी जमकर थिरके। पूरे रास्ते अबीर और गुलाल उड़ाया गया, जिससे ऐसा लगा मानो होली का त्यौहार समय से पहले आ गया हो। घोड़ी पर सवार होकर रघुवीर सिंह ने अपनी दूसरी पारी (करियर) को विराम दिया और तीसरी पारी (सेवानिवृत्ति) की शुरुआत की।

'मुझे अपनी शादी का दिन याद आ गया'
इस सम्मान से अभिभूत होकर रघुवीर सिंह तोमर काफी भावुक दिखे। उन्होंने मुस्कराते हुए कहा कि आज मुझे अपनी शादी का वो दिन याद आ गया जब मैं दुल्हन लेने घोड़ी पर चढ़ा था। साथियों ने मुझे जो प्यार और सम्मान दिया है, वह मेरे जीवन की सबसे बड़ी पूंजी है।

BSA ने की जमकर तारीफ
बेसिक शिक्षा अधिकारी (BSA) राहुल मिश्रा ने रघुवीर सिंह के बेदाग कार्यकाल की सराहना की। उन्होंने कहा कि मानव जीवन के तीन सबसे बड़े पड़ाव होते हैं—शिक्षा, विवाह और रिटायरमेंट। विभाग ने उनके इस आखिरी पड़ाव को उत्सव में बदल दिया क्योंकि वह विभाग की रीढ़ की तरह थे।

रॉयल कार से घर तक विदाई
जश्न सिर्फ घोड़ी तक सीमित नहीं रहा। घोड़ी पर शौर्य प्रदर्शन और नाच-गाने के बाद, रघुवीर सिंह को एक सजी हुई रॉयल वेडिंग कार में ससम्मान बैठाया गया और पूरा स्टाफ उन्हें छोड़ने उनके घर तक गया।

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