संभल में एक बार फिर चला योगी का बुलडोजर, सरकारी जमीन पर बने अवैध मदरसा, मस्जिद को किया ध्वस्त

Edited By Ramkesh,Updated: 04 Jan, 2026 03:14 PM

yogi s bulldozers once again ran in sambhal demolishing illegal madrasas

उत्तर प्रदेश के संभल जिले में प्रशासन की सख्त कार्रवाई ने पूरे इलाके का ध्यान खींचा। सुबह से ही जिले में अवैध निर्माण के खिलाफ बुलडोजर अभियान चलाया जा रहा है। सरकारी जमीन पर बने अवैध ढांचों को हटाने के तहत पहले मस्जिद और फिर मदरसे पर कार्रवाई की गई।

संभल: उत्तर प्रदेश के संभल जिले में प्रशासन की सख्त कार्रवाई ने पूरे इलाके का ध्यान खींचा। सुबह से ही जिले में अवैध निर्माण के खिलाफ बुलडोजर अभियान चलाया जा रहा है। सरकारी जमीन पर बने अवैध ढांचों को हटाने के तहत पहले मस्जिद और फिर मदरसे पर कार्रवाई की गई।

सरकारी जमीन से हटाया गया अवैध मदरसा
संभल के सलेमपुर सालार उर्फ हाजीपुर गांव में प्रशासन ने 1339 वर्ग मीटर सरकारी भूमि पर बने अवैध मदरसे को ध्वस्त करने की कार्रवाई शुरू की। अधिकारियों के अनुसार, मदरसे का निर्माण बिना अनुमति सरकारी जमीन पर किया गया था। इस मामले में प्रशासन ने मदरसा प्रबंधन पर करीब 52 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया है। बुलडोजर कार्रवाई के साथ-साथ जमीन को कब्जा मुक्त कराया जा रहा है। प्रशासन का कहना है कि कार्रवाई पूरी होने के बाद इस भूमि का उपयोग जरूरतमंद लोगों के हित में किया जाएगा।

तालाब की भूमि पर बनी मस्जिद पर भी कार्रवाई
वहीं, रायाबुजुर्ग गांव में तालाब की सरकारी जमीन पर बनी मस्जिद के अवैध हिस्सों को गिराने की कार्रवाई की गई। अदालत के आदेश के बावजूद मस्जिद कमेटी द्वारा केवल आंशिक ढांचा हटाए जाने पर प्रशासन ने शेष निर्माण को भी ध्वस्त करने का निर्णय लिया। इसके तहत बुलडोजर लगाकर पूरे ढांचे को हटाया जा रहा है।

प्रशासन अलर्ट, भारी पुलिस बल तैनात
कार्रवाई के दौरान किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए डीएम और एसपी की अगुवाई में भारी पुलिस बल तैनात किया गया। प्रशासनिक अधिकारियों ने बताया कि यह कार्रवाई पूरी तरह कानूनी प्रक्रिया और न्यायालय के आदेशों के तहत की जा रही है।

गरीबों को मिलेगा आवास
प्रशासन के अनुसार, साल 2000 में सलेमपुर गांव की यह जमीन गरीब परिवारों को आवास आवंटन के लिए चिन्हित की गई थी। आरोप है कि 2005 में इस पर अवैध कब्जा कर मस्जिद का निर्माण कर दिया गया।अब अवैध निर्माण हटाए जाने के बाद मौके पर ही 20 गरीब परिवारों को आवासीय पट्टे आवंटित किए गए हैं। इस फैसले से गांव के लोगों में संतोष देखा गया और कई ग्रामीणों ने प्रशासन की कार्रवाई का स्वागत किया।

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