मथुरा-काशी में पहले मंदिर थे, कोई शक नहीं! सौहार्द के लिए दावा छोड़ें मुसलमान- पूर्व ASI अधिकारी के.के. मोहम्मद का बड़ा बयान

Edited By Ramkesh,Updated: 03 Dec, 2025 01:59 PM

there were temples in mathura and kashi no doubt muslims should give up their

ज्ञानवापी विवाद को लेकर भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) के पूर्व रीजनल डायरेक्टर के.के. मोहम्मद एक निजी चैनल से बातचीत के दौरान बड़ा बयान दिया है। उन्होंने मुस्लिम पक्ष को सलाह दी है कि मुसलमानों को बड़ा दिल दिखा कर ज्ञानवापी, मथुरा और काशी के...

वाराणसी: ज्ञानवापी विवाद को लेकर भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) के पूर्व रीजनल डायरेक्टर के.के. मोहम्मद एक निजी चैनल से बातचीत के दौरान बड़ा बयान दिया है। उन्होंने मुस्लिम पक्ष को सलाह दी है कि मुसलमानों को बड़ा दिल दिखा कर ज्ञानवापी, मथुरा और काशी के विवादित धार्मिक स्थलों पर अपना दावा छोड़ने पर विचार करना चाहिए। उन्होंने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि उन्हें लगता है कि हिंदू समाज के लिए ये स्थान उसी तरह पवित्र हैं जैसे मुसलमानों के लिए मक्का और मदीना है। 

धार्मिक सौहार्द के लिए बैठ कर हल निकालना चाहिए
मोहम्मद ने कहा कि “भारत धर्मनिरपेक्ष इसलिए है क्योंकि यहां हिंदू बहुसंख्यक हैं, और हिंदू समाज इन स्थानों को उतना ही पवित्र मानता है, जितना मुसलमान मक्का-मदीना को।”उनके इस अपील को कई साधु-संतों ने समर्थन भी दिया है। हालांकि उन्होंने इस बात को भी साफ कहा कि कानूनी मामलों पर टिप्पणी करने की उनकी स्थिति नहीं है। मथुरा हो या वाराणसी फैसला कोर्ट में होगा, लेकिन सामाजिक और धार्मिक सौहार्द के लिए हिंदू व मुस्लिम नेतृत्व को साथ बैठकर हल निकालना चाहिए। 

कोर्ट में मुस्लिम पक्ष के दावों का टिक पाना मुश्किल 
मोहम्मद ने अपने कार्यकाल को याद करते हुए कहा कि मथुरा और काशी, दोनों स्थानों पर उन्होंने खुद पुरातात्विक कार्य किया है, और उनके अनुसार "इन दोनों स्थलों पर पहले मंदिर थे, इसमें तनिक भी संदेह की गुंजाइश नहीं है।" उनका कहना है कि अदालत में यदि ASI की पूरी रिपोर्ट रखी जाए, तो मुस्लिम पक्ष के दावों का टिक पाना मुश्किल होगा।

कानूनी लड़ाई अदालत में जारी रहेगी
हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि कानूनी लड़ाई अदालत में जारी रहेगी, लेकिन स्थायी शांति केवल बातचीत से आएगी। दोनों समुदायों के शीर्ष नेताओं को मिलकर समाधान खोजने की सलाह भी उन्होंने दी। 

"कम्युनिस्ट इतिहासकारों ने माहौल बिगाड़ दिया
मोहम्मद ने यह भी याद किया कि अयोध्या मामले में भी उन्होंने मुस्लिम समाज से संवाद की कोशिश की थी। उनके अनुसार, तब भी एक बड़ा मुस्लिम वर्ग बातचीत के पक्ष में था, लेकिन कुछ "कम्युनिस्ट इतिहासकारों" और बाहरी समूहों ने माहौल बिगाड़ दिया। उन्होंने कहा कि आज भी मुस्लिम समाज में नई सोच उभर रही है। यदि सही मंच पर खुले दिल से बातचीत हो, तो तीनों विवादित स्थलों—अयोध्या, काशी, मथुरा—पर समाधान संभव है।


 

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