मदीना से आया गंगा-जमुनी तहजीब का संदेश: मुसलमान युवक ने हिंदू संत प्रेमानंद के लिए मांगी दुआ, इंसानियत से बढ़कर कोई धर्म नहीं

Edited By Anil Kapoor,Updated: 14 Oct, 2025 12:35 PM

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Prayagraj News: उत्तर प्रदेश के प्रयागराज जिले से एक दिल छू लेने वाली गंगा-जमुनी तहजीब की मिसाल सामने आई है। जहां के रहने वाले सूफियान इलाहाबादी नामक युवक ने उमरा यात्रा के दौरान मदीना से हिंदू संत प्रेमानंद महाराज के स्वास्थ्य लाभ के लिए दुआ मांगी...

Prayagraj News: उत्तर प्रदेश के प्रयागराज जिले से एक दिल छू लेने वाली गंगा-जमुनी तहजीब की मिसाल सामने आई है। जहां के रहने वाले सूफियान इलाहाबादी नामक युवक ने उमरा यात्रा के दौरान मदीना से हिंदू संत प्रेमानंद महाराज के स्वास्थ्य लाभ के लिए दुआ मांगी है। सूफियान इन दिनों मदीना दौरे पर हैं। उन्होंने अपने हाथ में मोबाइल लेकर एक वीडियो बनाया, जो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। इस वीडियो की लंबाई लगभग एक मिनट 20 सेकंड है। वीडियो में मदीना की मस्जिद साफ दिखाई दे रही है और मोबाइल में प्रेमानंद महाराज की तस्वीर नजर आ रही है।

मदीना से सूफियान ने प्रेमानंद महाराज के लिए की दुआ
सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, वीडियो में सूफियान कहते हैं कि यह हमारे प्रेमानंद महाराज जी हैं, जो हिंदुस्तान के बहुत अच्छे इंसान हैं। मुझे पता चला कि उनकी तबियत ठीक नहीं है। मैं यहां से उनकी जल्द से जल्द स्वस्थ होने की दुआ करता हूं। वे बहुत ही सच्चे और नेक दिल इंसान हैं। सूफियान ने आगे कहा कि हम मदीना शहर से हिंदू भाई के लिए दुआ करते हैं। ना हिंदू, ना मुसलमान, बल्कि बस नेक इंसान होना चाहिए। हम अल्लाह से प्रार्थना करते हैं कि महाराज जी को अच्छी सेहत और लंबी उम्र दें। यह एक प्यारा उदाहरण है कि कैसे धर्म और जाति के बंधनों से ऊपर उठकर इंसानियत को प्राथमिकता दी जा सकती है।

आरिफ खान की किडनी दान की पेशकश, आश्रम ने किया अस्वीकार
बताया जा रहा है कि इससे पहले मध्य प्रदेश के नर्मदापुरम (पहले होशंगाबाद) के रहने वाले आरिफ खान चिश्ती ने भी संत प्रेमानंद महाराज के प्रति अपनी भावना जताई थी। उन्होंने महाराज जी को अपनी किडनी दान करने की इच्छा व्यक्त की थी और इसके लिए उन्होंने प्रेमानंद महाराज और जिला प्रशासन को पत्र भी लिखा था। हालांकि, संत के आश्रम ने इस प्रस्ताव को विनम्रतापूर्वक अस्वीकार कर दिया था। यह दोनों घटनाएं साफ दिखाती हैं कि हमारे समाज में अभी भी प्यार, सहानुभूति और मानवता की गंगा-जमुनी तहजीब जीवित है।

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