Edited By Mamta Yadav,Updated: 09 Sep, 2025 05:23 PM

उत्तर प्रदेश की राजनीति एक बार फिर करवट ले रही है। बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की सुप्रीमो मायावती ने लंबे समय के राजनीतिक सन्नाटे के बाद ‘मिशन 2027’ के तहत सक्रियता तेज कर दी है। 9 अक्टूबर को पार्टी संस्थापक कांशीराम की पुण्यतिथि के मौके पर लखनऊ में...
Lucknow News: उत्तर प्रदेश की राजनीति एक बार फिर करवट ले रही है। बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की सुप्रीमो मायावती ने लंबे समय के राजनीतिक सन्नाटे के बाद ‘मिशन 2027’ के तहत सक्रियता तेज कर दी है। 9 अक्टूबर को पार्टी संस्थापक कांशीराम की पुण्यतिथि के मौके पर लखनऊ में प्रस्तावित विशाल रैली को बसपा के पुनरुत्थान का प्रतीक माना जा रहा है। यह रैली न सिर्फ पार्टी के मौजूदा समर्थकों को एकजुट करने की कवायद है, बल्कि ‘घर वापसी’ के नाम पर छिटके हुए दलित, पिछड़े और मुस्लिम वोट बैंक को फिर से अपने पक्ष में लाने की रणनीति का हिस्सा भी है।
बदले अंदाज़ में लौट रहीं मायावती
2012 के बाद से लगातार कमजोर हो रही बसपा 2022 के विधानसभा चुनावों में सिर्फ एक सीट पर सिमट गई थी। वहीं 2024 के लोकसभा चुनाव में पार्टी शून्य पर सिमट गई और वोट शेयर 9.39% तक गिर गया। अब मायावती ने दिल्ली छोड़ लखनऊ में डेरा डाल कर संगठन को बूथ स्तर पर पुनर्गठित करने की कवायद शुरू की है। उन्होंने विभिन्न जातीय और वर्गीय समीकरणों को ध्यान में रखते हुए पार्टी के भीतर नई कमेटियों का गठन किया है। इनमें अतिपिछड़े, गैर-जाटव दलित और मुस्लिम वोटों को साधने की खास रणनीति बनाई जा रही है।
परिवार को दी अहम भूमिका
हाल ही में मायावती ने भतीजे आकाश आनंद को दोबारा सक्रिय राजनीति में प्रमोट किया है और उनके ससुर अशोक सिद्धार्थ की ‘घर वापसी’ कराई गई है। इससे यह साफ संकेत मिलते हैं कि बसपा अब आंतरिक रूप से भी अपनी खोई ताकत वापस लाने की कोशिश कर रही है।
क्या बसपा का नया समीकरण सपा के लिए खतरा बनेगा?
अखिलेश यादव के ‘पीडीए (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक)’ फॉर्मूले ने 2024 में अच्छा काम किया, लेकिन अब मायावती भी ‘डीएम-ओबीसी-मुस्लिम’ समीकरण के साथ मैदान में उतर रही हैं। राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक, यदि बसपा इस गठजोड़ को फिर से सक्रिय कर पाती है, तो सपा की स्थिति कमजोर हो सकती है। जानकारों का कहना है कि मायावती की रणनीति गैर-यादव ओबीसी और छिटके दलित वोटर्स को फिर से बसपा की ओर मोड़ने की है। वहीं सपा प्रवक्ता मोहम्मद आजम का आरोप है कि मायावती भाजपा की ‘बी-टीम’ के रूप में काम कर रही हैं और सपा के बजाय विपक्षी एकता को कमजोर कर रही हैं।
क्या बनेगा चुनावी त्रिकोण?
अगर बसपा अपने पुराने जनाधार को दोबारा पाने में सफल होती है, तो यूपी की सियासत त्रिकोणीय हो सकती है — भाजपा, सपा और बसपा के बीच सीधी टक्कर। यह न केवल अखिलेश यादव की रणनीति को चुनौती देगा, बल्कि भाजपा को भी समीकरण बदलने पर मजबूर कर सकता है।