Edited By Ramkesh,Updated: 24 Feb, 2026 01:20 PM

उत्तर प्रदेश में विधान सभा चुनाव 2027 होने से पहले भारतीय जनता पार्टी अपने संगठन को नई धार देने की कोशिस में जुटी है। माना जा रहा है कि जनवरी 2026 में जारी यूजीसी के नए "इक्विटी रेगुलेशन 2026", और शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद विवाद को लेकर...
लखनऊ: उत्तर प्रदेश में विधान सभा चुनाव 2027 होने से पहले भारतीय जनता पार्टी अपने संगठन को नई धार देने की कोशिश में जुटी है। माना जा रहा है कि जनवरी 2026 में जारी यूजीसी के नए "इक्विटी रेगुलेशन 2026", और शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद विवाद को लेकर नाजर सामान्य वर्ग के वोट बैंक को एक बार फिर साधने के प्रयास में जुट गई है। दरअसल, उत्तर प्रदेश में मंत्रिमंडल विस्तार और संगठनात्मक फेरबदल को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। दिल्ली में हुई अहम बैठक के बाद सियासी गलियारों में अटकलें हैं कि आने वाले एक महीने के भीतर बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।
योगी मंत्रिमंडल का हो सकता है विस्तार
सूत्रों के अनुसार न सिर्फ भारतीय जनता पार्टी की प्रदेश संगठनात्मक टीम में फेरबदल होगा, बल्कि योगी मंत्रिमंडल का भी विस्तार किया जा सकता है। जिला इकाइयों से लेकर क्षेत्रीय अध्यक्षों तक बदलाव की तैयारी बताई जा रही है। प्रदेश संगठन की नई टीम जल्द घोषित हो सकती है, जिसमें कई पुराने पदाधिकारियों की जिम्मेदारियां बदली जा सकती हैं या नई नियुक्तियां की जा सकती हैं।
मंत्रिमंडल विस्तार के संकेत
सूत्रों का दावा है कि मंत्रिमंडल में कुछ नए चेहरों को शामिल किया जा सकता है। इनमें विधायकों के साथ संगठन से जुड़े सक्रिय पदाधिकारियों को भी मौका मिल सकता है। वहीं, कुछ मौजूदा मंत्रियों की छुट्टी भी संभव बताई जा रही है।
तीसरे डिप्टी सीएम पर मंथन
सबसे ज्यादा चर्चा तीसरे उपमुख्यमंत्री पद को लेकर है। माना जा रहा है कि पार्टी क्षेत्रीय संतुलन साधने के लिए यह बड़ा फैसला ले सकती है। पूर्वांचल के प्रभाव को संतुलित करने और पश्चिमी उत्तर प्रदेश को प्रतिनिधित्व देने के लिहाज से तीसरे डिप्टी सीएम का पद अहम माना जा रहा है।
ब्राह्मण समीकरण साधने की कोशिश?
राजनीतिक सूत्रों के मुताबिक पार्टी ब्राह्मण वर्ग की नाराजगी को दूर करने की रणनीति भी मंत्रिमंडल और संगठनात्मक बदलाव में शामिल कर सकती है। सामाजिक और क्षेत्रीय संतुलन को ध्यान में रखते हुए बड़े फैसले लिए जा सकते हैं।
आधिकारिक घोषणा नहीं
फिलहाल पार्टी की ओर से आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है, लेकिन दिल्ली बैठक के बाद से प्रदेश की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। अब सभी की नजरें संभावित मंत्रिमंडल विस्तार और संगठन में होने वाले बदलावों पर टिकी हैं।