पीडीए बनाम ‘डी प्लान’: दलित राजनीति में नई रणनीति के साथ मैदान में भाजपा

Edited By Ramkesh,Updated: 18 Feb, 2026 04:11 PM

pda vs  d plan  bjp enters dalit politics with a new strategy

उत्तर प्रदेश की सियासत में 2027 विधानसभा चुनाव को लेकर हलचल तेज हो गई है। सत्ता की राह में दलित वोट बैंक को निर्णायक माना जा रहा है। जहां समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव ‘पीडीए’ (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) फॉर्मूले के जरिए राजनीतिक समीकरण साधने...

लखनऊ: उत्तर प्रदेश की सियासत में 2027 विधानसभा चुनाव को लेकर हलचल तेज हो गई है। सत्ता की राह में दलित वोट बैंक को निर्णायक माना जा रहा है। जहां समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव ‘पीडीए’ (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) फॉर्मूले के जरिए राजनीतिक समीकरण साधने में जुटे हैं, वहीं भारतीय जनता पार्टी ने भी अपने समर्थन आधार को मजबूत करने के लिए नई रणनीति पर काम शुरू कर दिया है। इसी कड़ी में भाजपा ने दलित समाज को केंद्र में रखते हुए विशेष ‘डी प्लान’ तैयार किया है।

दलित महापुरुषों के जरिए सालभर संपर्क अभियान
भाजपा ने 15 दलित और वंचित समाज के महापुरुषों का वार्षिक कैलेंडर तैयार कराया है। इन महापुरुषों की जयंती और पुण्यतिथि के अवसर पर प्रदेशभर में कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। पार्टी का उद्देश्य इन आयोजनों के जरिए सालभर दलित समाज से संवाद बनाए रखना है। इस सूची में कांशीराम, संत रविदास, संत गाडगे, डॉ. भीमराव अंबेडकर, ज्योतिबा फुले, सावित्रीबाई फुले, उदा देवी, झलकारी बाई, वीरा पासी, लखन पासी, रमाबाई अंबेडकर और अहिल्याबाई होल्कर सहित करीब 15 हस्तियां शामिल हैं।

मायावती पर सीधा हमला नहीं, संतुलित सियासी संदेश
भाजपा ने अपनी रणनीति में दलित नेतृत्व पर सीधा हमला करने से परहेज रखा है। खास तौर पर मायावती को लेकर पार्टी सतर्क रुख अपनाए हुए है। पार्टी की कोशिश है कि वह दलित समाज के महापुरुषों और नेताओं के प्रति सम्मान का संदेश जमीन स्तर तक पहुंचाए।

2024 में बदले समीकरण, भाजपा को लगा झटका
2022 के विधानसभा चुनाव में योगी-मोदी सरकार की योजनाओं, खासकर कोरोना काल की मुफ्त राशन योजना, का असर दलित वोट बैंक पर दिखाई दिया था। इससे भाजपा को गैर-यादव ओबीसी वोटों के साथ दलित समर्थन भी मिला। हालांकि 2024 के लोकसभा चुनाव में ‘संविधान बदलने’ के मुद्दे और पीडीए राजनीति के जरिए अखिलेश यादव ने बसपा से छिटके दलित वोटों के एक हिस्से को अपने पक्ष में करने में सफलता पाई। इससे भाजपा को कुछ इलाकों में नुकसान उठाना पड़ा।

2027 के लिए सोशल इंजीनियरिंग पर फोकस
अब 2027 विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए भाजपा ने दलित राजनीति पर फोकस बढ़ा दिया है। पार्टी नए सिरे से सोशल इंजीनियरिंग के जरिए दलित समाज के बीच पकड़ मजबूत करने की कोशिश में है।

दलित महापुरुषों को सम्मान
रणनीति का मुख्य आधार दलित महापुरुषों की विरासत को सम्मान देना, सरकारी योजनाओं की जानकारी समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना और निरंतर संवाद कायम रखना है। योगी आदित्यनाथ सरकार भी विभिन्न वर्गों तक योजनाओं का लाभ पहुंचाने को अपनी प्राथमिकता बता रही है।

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