Edited By Anil Kapoor,Updated: 17 Feb, 2026 08:27 AM

Kanpur News: उत्तर प्रदेश के स्वास्थ्य सिस्टम की एक ऐसी तस्वीर सामने आई है जो दावों और हकीकत के बीच की खाई को उजागर करती है। दक्षिण कानपुर में 45 करोड़ रुपये की भारी-भरकम लागत से बना 100 बेड का अस्पताल एक साल से उद्घाटन की राह....
Kanpur News: उत्तर प्रदेश के स्वास्थ्य सिस्टम की एक ऐसी तस्वीर सामने आई है जो दावों और हकीकत के बीच की खाई को उजागर करती है। दक्षिण कानपुर में 45 करोड़ रुपये की भारी-भरकम लागत से बना 100 बेड का अस्पताल एक साल से उद्घाटन की राह देख रहा है। विडंबना देखिए, जिस अस्पताल को मार्च 2025 में खुल जाना चाहिए था, वह 2026 की शुरुआत तक भी सफेद हाथी बना खड़ा है।
सत्ता का रसूख बनाम जनता की जरूरत
इस मामले में सबसे हैरान करने वाला पहलू 'राजनीतिक प्राथमिकता' है। स्थानीय लोगों के मुताबिक, जिस समय इस अस्पताल का शिलान्यास हुआ, ठीक उसी वक्त इसके बगल में भाजपा कार्यालय की नींव भी रखी गई थी। आज भाजपा का आलीशान दफ्तर पूरी तरह सक्रिय है, जहां बड़े नेताओं और मंत्रियों का जमावड़ा लगा रहता है। लेकिन चंद कदमों की दूरी पर बना अस्पताल स्टाफ और बजट की कमी के कारण धूल फांक रहा है।
अपनों को खोती जनता का दर्द
अस्पताल के न खुलने की कीमत आम आदमी अपनी जान देकर चुका रहा है। स्थानीय निवासी आकाश की कहानी दिल दहला देने वाली है। उन्होंने बताया कि अगर यह अस्पताल समय पर शुरू हो गया होता, तो उनके पिता को दूसरे अस्पतालों के चक्कर नहीं काटने पड़ते और शायद आज वह जीवित होते। यह सिर्फ आकाश की कहानी नहीं, बल्कि दक्षिण कानपुर की उस 20 लाख की आबादी का दर्द है जिसे इलाज के लिए मीलों दूर 'हैलट' या 'कार्डियोलॉजी' अस्पताल भागना पड़ता है।
अधिकारी बोले- बिल्डिंग है, पर डॉक्टर कहां से लाएं?
जब इस देरी पर कानपुर के मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) से सवाल किया गया, तो उन्होंने सिस्टम की खामियां गिना दीं। उन्होंने कहा कि बिल्डिंग तैयार है, लेकिन डॉक्टरों, नर्सों और पैरामेडिकल स्टाफ की भर्ती के लिए बजट अब तक स्वीकृत नहीं हुआ है। शासन को कई बार पत्र भेजे गए, लेकिन 'मैनपावर' और जरूरी उपकरणों की फाइलें लखनऊ के दफ्तरों में अटकी हुई हैं।ओटी (Operation Theater) और ऑक्सीजन पाइपलाइन जैसी बुनियादी सुविधाएं स्टाफ के बिना शुरू नहीं की जा सकतीं।
स्वास्थ्य मंत्री के दावों पर सवाल
यह मामला सीधे तौर पर प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री और डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक की कार्यशैली पर सवाल उठाता है। जब सरकार, स्वास्थ्य मंत्री और स्थानीय सांसद-विधायक सभी एक ही दल के हैं, तो फिर समन्वय की कमी क्यों है? जनता पूछ रही है कि क्या करोड़ों की यह इमारत सिर्फ दिखावे के लिए बनाई गई थी?