पंचायत चुनाव: आरक्षण से कोई खुश तो किसी का टूटा दिल, कईयों के लिए वरदान साबित हुआ अंतरजातीय विवाह

Edited By Umakant yadav,Updated: 07 Mar, 2021 01:30 PM

if someone is happy with reservation then someone s broken heart

कहते हैं वक्त कब कैसे करवट लेता है कोई नहीं जानता। ऐसा ही कुछ यूपी में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में देखने को मिल रहा है। जहां आरक्षण लिस्ट जारी होने के बाद गांव में चुनावी हलचल शुरू हो गई है। कई रिश्ते जो वर्षों से दूर थे वह करीब और कई करीबी दूर होते...

सिद्धार्थनगर: कहते हैं वक्त कब कैसे करवट लेता है कोई नहीं जानता। ऐसा ही कुछ यूपी में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में देखने को मिल रहा है। जहां आरक्षण लिस्ट जारी होने के बाद गांव में चुनावी हलचल शुरू हो गई है। कई रिश्ते जो वर्षों से दूर थे वह करीब और कई करीबी दूर होते देखे जा रहे हैं। आरक्षण लिस्ट जारी होने के बाद अंतरजातीय शादियां भी कहीं-कहीं वरदान साबित हो रही हैं। जिले में करीब दर्जनभर उम्मीदवार ऐसे हैं जिनकी आरक्षण सूची निकलने पर चुनाव लड़ने की उम्मीद ही खत्म हो गई थी। ऐसे में अंतरजातीय विवाह की वजह से उनके घर आई उनकी बहू या पत्नी उम्मीदवार बनकर उनके प्रधानी की उम्मीद को बरकरार रखे हुए हैं।

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आरक्षण ने यूनुस के अरमानों पर फेरा पानी, तो पत्नी बनी मसीहा
जिले के बर्डपुर नंबर 11 में रहने वाले यह यूनुस खान यूनुस खान है। कई बार यूनुस खान इस ग्राम पंचायत से प्रधान निर्वाचित हो चुके हैं। पिछले वर्ष यहां की सीट सामान्य थी। लड़े और हार गए। इस बार चुनाव लड़ने की पहले से तैयारी थी। आरक्षण की लिस्ट निकली उनकी ग्राम पंचायत ओबीसी हो गई। यूनुस तो तुर्क खान है भला कैसे लड़ते। ऐसे में इनकी पत्नी आसरा बानो उनके लिए मसीहा बन गई। आसरा बानो मुस्लिम में अंसारी जाति की है जो ओबीसी में आती है।

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अंतरजातीय हुई शादी का पंचायत चुनाव में मिल रहा फायदा:यूनुस खान  
अपनी अंतरजातीय हुई शादी और उसका आज फायदा मिलने के बारे में यूनुस खान कहते हैं कि 1975 में उनकी शादी हुई थी। जाहिर है उस वक्त आरक्षण या इसके फायदे की बात तो दूर तक नहीं थी। लेकिन आज जब इसका फायदा मिल रहा है, संविधान हमें इसकी इसका अधिकार दे रहा है तो क्यों ना इसका लाभ लें।

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विशंभर के लिए उनकी बहू राजेश्वरी बनी संकट मोचन 
इसी तरह ग्राम पंचायत बर्डपुर नंबर 10 एससी के लिए आरक्षित हो गई। इस क्षेत्र में कई सालों से प्रधानी के लिए मेहनत करने वाले विशंभर गौड़ के पैर के नीचे से जमीन ही निकल गई। ऐसे में उनकी बहू राजेश्वरी देवी उनके लिए संकट मोचन बन गई। राजेश्वरी एससी जात की है और डिग्री में बी.ए. बीटीसी हैं। पढ़ाई के समय ही विशंभर के पुत्र राजेश से प्रेम हुआ और 6 साल पूर्व विवाह भी हो गया।

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राजेश्वरी के ससुर विशंभर कहते हैं कि एससी सीट है हम तो नहीं लड़ सकते। लेकिन हमारी बहू लड़ेगी यह उसका हक है।

 

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