Edited By Ramkesh,Updated: 03 Mar, 2026 02:27 PM

पने बयानों को लेकर सुर्खियों में रहने वाली यूपी पुलिस एक बाद फिर चर्चा में हैं। दरअसल, मेरठ जिले में ब्रह्मपुरी सर्किल की सीओ सौम्या आस्थाना का एक कथित ऑडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें वह अधीनस्थ पुलिसकर्मियों को निर्देश देती...
मेरठ: अपने बयानों को लेकर सुर्खियों में रहने वाली यूपी पुलिस एक बाद फिर चर्चा में हैं। दरअसल, मेरठ जिले में ब्रह्मपुरी सर्किल की सीओ सौम्या आस्थाना का एक कथित ऑडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें वह अधीनस्थ पुलिसकर्मियों को निर्देश देती सुनाई दे रही हैं कि यदि कोई पत्रकार थाने के अंदर वीडियो बनाता है तो उसके खिलाफ तुरंत मुकदमा दर्ज किया जाए। ऐसा नहीं करने वाले जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाइर की बता की जा रही है। करीब 29 सेकेंड के इस वायरल ऑडियो को लेकर पत्रकार संगठन ने कड़ी नाराजगी जताई है। हालांकि इस ऑडियो की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
वायरल ऑडियो को लेकर पत्रकारों में रोष
ऑडियो वायरल होने के बाद पत्रकारों में रोष फैल गया और सोशल मीडिया पर विरोध के स्वर उठने लगे। मामला लखनऊ तक पहुंच गया, जिसके बाद मुख्यालय स्तर से विस्तृत रिपोर्ट तलब की गई है। एडीजी जोन ने भी पूरे प्रकरण की जांच के आदेश दे दिए हैं।
लोकतंत्र के चौथे स्तंभ को दबाने की कोशिश- सपा
इस बीच विपक्षी दलों ने भी इस मामले को लेकर पुलिस प्रशासन पर सवाल उठाए हैं। समाजवादी पार्टी के मीडिया सेल ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर ऑडियो साझा करते हुए इसे लोकतंत्र के चौथे स्तंभ को दबाने की कोशिश बताया है।
थाने में वीडियो रिकॉर्डिंग करना गोपनीयता अधिनियम का उल्लंघन नहीं
कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि आमतौर पर पुलिस थाने में मीडिया द्वारा वीडियो रिकॉर्डिंग को आधिकारिक गोपनीयता अधिनियम 1923 का उल्लंघन नहीं माना जाता है। अदालतों ने भी स्पष्ट किया है कि पुलिस थाना 'निषिद्ध स्थान' की श्रेणी में नहीं आता।
वायरल ऑडियो पर पुलिस कप्तान ने दी सफाई
विवाद बढ़ने के बाद मेरठ के पुलिस कप्तान ने सफाई देते हुए कहा कि यह निर्देश पत्रकारों के लिए नहीं बल्कि कुछ पोर्टल संचालकों के संदर्भ में दिया गया था, जो अनावश्यक वीडियो बना रहे थे। उन्होंने कहा कि थानों में पत्रकारों की वीडियो रिकॉर्डिंग पर कोई प्रतिबंध नहीं है और यदि कोई भ्रम पैदा हुआ है तो उसे दूर किया जाएगा। वहीं पत्रकार संगठनों ने चेतावनी दी है कि यदि पुलिस ने पारदर्शिता के बजाय पत्रकारों को निशाना बनाया तो वे बडेी स्तर पर आंदोलन करने को मजबूर होंगे।