गोरखपुर: MBBS डॉक्टर को नहीं आता इंजेक्शन लगाना! 15 साल की बच्ची की नस में तोड़ दिया निडिल; लापरवाही पर CMO ने दिए जांच के आदेश

Edited By Mamta Yadav,Updated: 19 Sep, 2025 05:07 PM

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जिले के गगहा थाना क्षेत्र के महुराई सिंघला गांव में एक 15 वर्षीय बच्ची रंजना यादव को अस्पताल में लापरवाही का ऐसा खामियाजा भुगतना पड़ा, जो उसकी जान पर बन आई। परिजनों के अनुसार, निजी अस्पताल के एक कर्मचारी ने गलत तरीके से इंजेक्शन लगाया, जिससे...

Gorakhpur News: जिले के गगहा थाना क्षेत्र के महुराई सिंघला गांव में एक 15 वर्षीय बच्ची रंजना यादव को अस्पताल में लापरवाही का ऐसा खामियाजा भुगतना पड़ा, जो उसकी जान पर बन आई। परिजनों के अनुसार, निजी अस्पताल के एक कर्मचारी ने गलत तरीके से इंजेक्शन लगाया, जिससे इंजेक्शन की सुई (निडिल) टूटकर बच्ची की नस में फंस गई। घटना के बाद न केवल अस्पताल प्रशासन पर गंभीर सवाल उठे, बल्कि पुलिस पर भी आरोप लगे कि उन्होंने शिकायत को गंभीरता से नहीं लिया। फिलहाल बच्ची का ऑपरेशन कर निडिल निकाल दी गई है और अब वह खतरे से बाहर है। सीएमओ गोरखपुर ने मामले की जांच के आदेश दे दिए हैं।
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क्या हुआ था?
रंजना की तबीयत खराब होने पर परिवार वाले उसे लेकर हाटा स्थित एक अस्पताल में गए। वहां एक कर्मचारी ने बाएं हाथ में इंजेक्शन लगाया, लेकिन तुरंत ही रंजना को असहनीय दर्द शुरू हो गया। थोड़ी देर बाद दूसरे हाथ में भी इंजेक्शन लगाया गया, मगर आराम नहीं मिला। रातभर दर्द से कराहती बच्ची को परिजन दोबारा अस्पताल ले गए, लेकिन वहां से सिर्फ दवा देकर वापस भेज दिया गया। दर्द बढ़ने पर एक्स-रे करवाया गया, जिसमें खुलासा हुआ कि निडिल टूटकर नस में फंसी हुई है।
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अस्पताल ने किया इंतजार, फिर भगाया
एक्स-रे रिपोर्ट लेकर जब परिजन दोबारा उसी अस्पताल पहुंचे, तो वहां उन्हें पूरे दिन अस्पताल में बैठाए रखा गया और आखिर में बदसलूकी कर भगा दिया गया। इससे आहत परिवार ने गगहा थाने में शिकायत की, लेकिन वहां भी कोई सुनवाई नहीं हुई।

 डीएम से की शिकायत, सीएमओ ने दिए जांच के आदेश
न्याय न मिलने पर पीड़ित परिवार ने जिलाधिकारी कार्यालय में गुहार लगाई, जिसके बाद DM गोरखपुर ने सीएमओ को तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए। बच्ची को जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां डॉक्टरों ने 2 दिन इलाज के बाद सफल ऑपरेशन कर नस में फंसी निडिल निकाल दी।

परिजनों की मांग: हो सख्त कार्रवाई
रंजना की मां सीमा यादव का कहना है कि अगर समय पर सही इलाज मिलता, तो बच्ची को इतनी पीड़ा नहीं झेलनी पड़ती। उन्होंने मांग की कि ग़ैरजिम्मेदार अस्पताल कर्मचारियों पर सख्त कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में किसी और मरीज के साथ ऐसी लापरवाही न हो।

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