Edited By Purnima Singh,Updated: 13 Mar, 2026 04:18 PM

रमज़ान का महीना अभी अपने अंतिम दौर में भी नहीं पहुंचा है, लेकिन शहरों और कस्बों के ईद बाजारों में ऐसा नज़ारा देखने को मिल रहा है मानो चांद रात पहले ही आ गई हो। कपड़ों की दुकानों से लेकर जूते, टोपी, इत्र और सेवइयों के स्टॉल तक हर जगह जबरदस्त भीड़...
प्रयागराज (सैय्यद आकिब रजा) : रमज़ान का महीना अभी अपने अंतिम दौर में भी नहीं पहुंचा है, लेकिन शहरों और कस्बों के ईद बाजारों में ऐसा नज़ारा देखने को मिल रहा है मानो चांद रात पहले ही आ गई हो। कपड़ों की दुकानों से लेकर जूते, टोपी, इत्र और सेवइयों के स्टॉल तक हर जगह जबरदस्त भीड़ उमड़ रही है। बाजारों में लोगों की चहल-पहल इतनी ज्यादा है कि दुकानदार भी हैरान हैं कि आखिर इस बार इतनी जल्दी खरीदारी क्यों शुरू हो गई।
दरअसल इसके पीछे एक बड़ी वजह मिडिल ईस्ट में बढ़ता तनाव और उससे जुड़ी महंगाई को माना जा रहा है। अंतरराष्ट्रीय हालातों के कारण पेट्रोलियम और गैस की कीमतों में लगातार उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है। हाल ही में रसोई गैस के दाम बढ़ने के बाद लोगों को यह डर सताने लगा है कि कहीं आने वाले दिनों में त्योहार से जुड़ी चीजों के दाम भी अचानक न बढ़ जाएं। यही वजह है कि लोग ईद से पहले ही जमकर खरीदारी करने में जुट गए हैं।
कपड़ा बाजार के व्यापारी रजी खान का कहना है कि इस बार हालात बिल्कुल अलग हैं। आम तौर पर ईद से दो-तीन दिन पहले जो भीड़ दिखाई देती है, वही भीड़ इस समय रोज देखने को मिल रही है। दुकानदार बताते हैं कि सुबह से लेकर देर रात तक ग्राहकों का तांता लगा हुआ है। कई दुकानों पर तो हालत यह है कि ग्राहकों को अपनी बारी के लिए इंतजार करना पड़ रहा है।
दूसरी ओर ग्राहकों का कहना है कि महंगाई का असर हर घर की रसोई तक पहुंच चुका है। ऐसे में लोग पहले ही कपड़े, जूते और बच्चों के लिए जरूरी सामान खरीद लेना चाहते हैं, ताकि आखिरी वक्त में बढ़े दामों का सामना न करना पड़े। बाजारों में उमड़ती भीड़ और तेज होती खरीदारी यह साफ संकेत दे रही है कि इस बार ईद की रौनक पहले से ही अपने चरम पर पहुंच चुकी है। अगर यही हाल रहा तो आने वाले दिनों में बाजारों की चमक और भी बढ़ सकती है।