अभियंता संघ की मांग, ऊर्जा निगमों के ईआरपी में भ्रष्टाचार की हो CBI जांच

Edited By Ramkesh,Updated: 16 Mar, 2022 07:43 PM

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उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत परिषद अभियंता संघ के अध्यक्ष वीपी सिंह ने ऊर्जा निगमों के प्रबंधन पर इंटरप्राइजेस रिर्सोस प्लानिंग (ईआरपी) में अरबों रूपये के भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुये मामले की सीबीआई जांच कराने की मांग मुख्यमंत्री से की है। उप्र...

मथुरा: उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत परिषद अभियंता संघ के अध्यक्ष वीपी सिंह ने ऊर्जा निगमों के प्रबंधन पर इंटरप्राइजेस रिर्सोस प्लानिंग (ईआरपी) में अरबों रूपये के भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुये मामले की सीबीआई जांच कराने की मांग मुख्यमंत्री से की है। उप्र ऊर्जा निगमों के अभियन्ताओं एवं जूनियर इंजीनियरों ने इस संवेदनशील मामले को लेकर मंगलवार से प्रदेश स्तर पर अपना आंदोलन भी शुरू कर दिया है। अभियंता संघ ने चेतावनी दी है कि अरबों रुपये के भ्रष्टाचार पर पर्दा डालने के लिए यदि लोकतांत्रिक आंदोलन का दमन किया गया तो परिणाम गंभीर होंगे।

सिंह ने बुधवार को यहां पत्रकारो से बातचीत में कहा कि यूपी पावर कारपोरेशन लिमिटेड ने 29 दिसम्बर 2018 को एसेन्चर सोल्यूशन प्रा लिमिटेड को 244.49 करोड़ रूपये, उप्र राज्य विद्युत उत्पादन निगम लि द्वारा 21 सितम्बर 2019 को लार्सन एवं एलएण्डटी इन्फोटेक लि को 122 करोड़ रूपये, एक जनवरी 2021 को ओडिसी कम्प्यूटर्स को 38.49 करोड़ रूपये एवं उप्र पावर ट्रांसमिशन कारपोरेशन लि द्वारा 04 दिसम्बर .2020 को एसेन्चर सोल्यूशन प्रा लि को 52.98 करोड़ रूपये का आदेश देकर भुगतान देना शुरू कर दिया गया है। इसे जोड़ने पर कुल धनराशि 457.97 करोड़ रूपये होती है जिस पर 18 प्रतिशत जीएसटी जोड़ने पर कुल खर्च 511.52 करोड़ रूपये बनता है, जबकि ऊर्जा निगमों के प्रबन्धन ने मात्र 244 करोड़ रूपये का ही हवाला दिया है जो कि पूरी तरह असत्य है क्योंकि उक्त सभी आदेशों की प्रतिलिपि संगठनों के पास है।

 उन्होंने बताया कि प्रारंभिक आदेशों में लगभग 511.52 करोड़ रूपये ईआरपी लागू करने के आदेश दिए गए है, यही नहीं ईआरपी की पूरी प्रणाली लागू होने तक खर्च लगभग 700 करोड़ रूपये तक पहुंच जायेगा। सिंह ने कहा कि किस स्तर का घालमेल किया गया है इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि देश के अधिक कर्मचारी एवं सबसे अधिक विद्युत उपभोक्ता वाले प्रदेश महाराष्ट्र में विद्युत वितरण कम्पनी ने मात्र 25 करोड़ रूपये में ईआरपी प्रणाली के कार्य का आदेश दिया है। उसकी तुलना में यूपी में 20 गुना से अधिक की धनराशि खर्च की गयी जो कि सरासर भ्रष्टाचार है।  सिंह ने कहा कि अपनी सफाई में प्रबंधन ने जो प्रेस नोट जारी किया है वह मात्र झूठ का पुलिन्दा है। उनका कहना था कि यदि एस्मा लगाकर पुलिस की मदद से आंदोलन को कुचलने की कोशिश की गई तो संगठन जेल भरो आंदोलन चलाने को मजबूर होगा।  

उन्होने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से प्रदेश सरकार की भ्रष्टाचार के प्रति जीरो टोलरेन्स नीति की खुलेआम धज्जियां उड़ाने वाले अरबों रूपये के इस घोटाले की सीबीआई से उच्च स्तरीय जांच कराकर घोटाले के दोषी शीर्ष प्रबन्धन पर कठोर कारर्वाई करने का अनुरोध किया है। सरकारी पैसे का घालमेल करने का एक और उदाहरण देते हुए उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत परिषद अभियंता संघ के प्रदेश अध्यक्ष वीपी सिंह ने बताया कि विगत वर्ष सितम्बर-अक्टूबर में विद्युत उत्पादन निगम के ताप बिजली घरों में कोयले के संकट का मुख्य कारण कोयला खरीद का समय से भुगतान न कर पाना है जिसके लिए शीर्ष ऊर्जा प्रबन्धन सीधे जिम्मेदार है क्योंकि उप्र राविउनिलि लगातार मुनाफा देने वाली एवं प्रदेश को सबसे सस्ती बिजली देनेवाली विद्युत उत्पादन कम्पनी है ऐसे में शीर्ष ऊर्जा प्रबन्धन द्वारा उनिलि को कोयले के भुगतान की अदायगी समय न करना एव 20 रूपये प्रति यूनिट अतिरिक्त खर्च कर एनर्जी एक्सचेंज से बिजली का खरीदा जाना शीर्ष ऊर्जा प्रबन्धन की विफलता एवं भ्रष्टाचार का दूसरा नमूना है। 

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