बिहार के बाद अब UP में भी SIR की तैयारी, विधान परिषद के चुनाव से पहले 30 सितंबर से शुरू होगा वोटर लिस्ट पुनरीक्षण

Edited By Mamta Yadav,Updated: 20 Sep, 2025 01:49 AM

after bihar up is now gearing up for sir

बिहार के बाद अब उत्तर प्रदेश में भी विधान परिषद चुनाव से पहले विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision - SIR) की प्रक्रिया शुरू होने जा रही है। राज्य में आगामी महीनों में 11 सीटों पर स्नातक और शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों में चुनाव प्रस्तावित...

Lucknow News: बिहार के बाद अब उत्तर प्रदेश में भी विधान परिषद चुनाव से पहले विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision - SIR) की प्रक्रिया शुरू होने जा रही है। राज्य में आगामी महीनों में 11 सीटों पर स्नातक और शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों में चुनाव प्रस्तावित हैं। इसके लिए 30 सितंबर से मतदाता सूची के De-Novo पुनरीक्षण की प्रक्रिया शुरू की जाएगी, जो 30 दिसंबर को अंतिम प्रकाशन के साथ पूर्ण होगी। मुख्य निर्वाचन अधिकारी द्वारा जारी आदेश के अनुसार, उत्तर प्रदेश विधान परिषद के जिन पांच स्नातक निर्वाचन क्षेत्र- लखनऊ, वाराणसी, आगरा, मेरठ, इलाहाबाद-झांसी तथा छह शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र- लखनऊ, वाराणसी, आगरा, मेरठ, बरेली-मुरादाबाद और गोरखपुर-फैजाबाद में चुनाव होने हैं, वहाँ के निर्वाचक नामावली का विशेष गहन पुनरीक्षण किया जाएगा।

मतदाता बनने की पात्रता क्या है?
स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में नाम शामिल कराने के लिए आवेदक को 1 नवंबर 2025 की अर्हता तिथि से कम से कम 3 वर्ष पहले भारत के किसी विश्वविद्यालय से स्नातक डिग्री प्राप्त करनी चाहिए या समकक्ष योग्यता होनी चाहिए। शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र के लिए, आवेदक को पिछले छह वर्षों में से कम से कम तीन वर्ष किसी माध्यमिक या उच्चतर शैक्षणिक संस्थान में निरंतर शिक्षण कार्य करते हुए होना चाहिए।

पुनरीक्षण से जुड़ी प्रशासनिक जिम्मेदारियां:

  • संबंधित निर्वाचन क्षेत्रों के मंडलायुक्त को निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी नियुक्त किया गया है।
  • जिलाधिकारी और संबंधित विधानसभा निर्वाचन क्षेत्रों के अधिकारी सहायक निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी होंगे।


SIR क्या है और क्यों जरूरी है?
SIR यानी Special Intensive Revision का उद्देश्य है-

सभी पात्र नागरिकों के नाम निर्वाचक नामावली में शामिल करना, अपात्र वोटरों को हटाना और पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी बनाना। यह पुनरीक्षण भारत के संविधान के अनुच्छेद 326 और जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 16 के अनुसार किया जा रहा है।

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