Viral News: मुंह के अंदर आंखें! वैज्ञानिक भी रह गए हैरान, प्रकृति का सबसे अजीब मेंढक आया सामने

Edited By Anil Kapoor,Updated: 09 Nov, 2025 10:35 AM

a frog with eyes in its mouth even scientists were astonished

Viral News: क्या आपने कभी सोचा है कि अगर किसी जीव की आंखें उसके मुंह के अंदर हों तो वह कैसे देखेगा? यह किसी साइंस फिक्शन फिल्म की कहानी लगती है, लेकिन यह हकीकत है! साल 1992 में कनाडा के ओंटारियो प्रांत के बर्लिंगटन काउंटी में वैज्ञानिकों को एक ऐसा...

Viral News: क्या आपने कभी सोचा है कि अगर किसी जीव की आंखें उसके मुंह के अंदर हों तो वह कैसे देखेगा? यह किसी साइंस फिक्शन फिल्म की कहानी लगती है, लेकिन यह हकीकत है! साल 1992 में कनाडा के ओंटारियो प्रांत के बर्लिंगटन काउंटी में वैज्ञानिकों को एक ऐसा मेंढक (टोड) मिला, जिसकी आंखें सिर पर नहीं, बल्कि उसके मुंह के अंदर थीं!

जब वैज्ञानिक भी रह गए दंग
इस अजीब जीव की तस्वीर वैज्ञानिक स्कॉट गार्डनर ने खींची थी। उन्होंने बताया कि जब उन्होंने इस टोड को पहली बार देखा, तो वे हैरान रह गए, क्योंकि यह तभी देख पाता था जब वह अपना मुंह खोलता था। उसकी आंखें मुंह की ऊपरी सतह के अंदर थीं। यह नजारा जितना अनोखा और डरावना, उतना ही वैज्ञानिकों के लिए दिलचस्प था।

कैसे हुई यह अजीब घटना?
वैज्ञानिकों ने बताया कि ऐसा एक बहुत ही दुर्लभ जेनेटिक गलती की वजह से हुआ, जिसे 'मैक्रोम्यूटेशन' (Macro Mutation) कहा जाता है। आम तौर पर, जब कोई जीव बनता है तो उसके शरीर के अंग (सिर, आंखें, पैर आदि) एक तय जगह पर विकसित होते हैं। लेकिन अगर जीन में कोई गलती हो जाए या बाहरी प्रभाव पड़े, तो ये अंग गलत जगह बन सकते हैं। इस टोड के भ्रूण में आंखों के बनने की प्रक्रिया शुरुआती अवस्था में ही गड़बड़ा गई, और आंखें सिर पर बनने के बजाय मुंह के अंदर बन गईं।

वैज्ञानिकों ने बताए तीन मुख्य कारण
1. परजीवी संक्रमण (Trematode Infection)
कुछ परजीवी (worms) ऐसे होते हैं जो मेंढकों या टोड के शरीर में घुसकर अंगों के विकास को प्रभावित करते हैं। वैज्ञानिकों का मानना है कि किसी ट्रेमाटोड परजीवी ने भ्रूण के विकास के दौरान उसकी आंखों की स्थिति बदल दी होगी।

2. आनुवंशिक गलती (Genetic Error)
डीएनए की कॉपी बनाते समय एक छोटी-सी गलती भी बड़ा असर डाल सकती है। इस मामले में यही हुआ — एक जेनेटिक एरर के कारण आंखें गलत जगह यानी मुंह के अंदर विकसित हो गईं।

3. पर्यावरणीय ज़हर (Environmental Toxins)
1990 के दशक में ओंटारियो के कई तालाबों में प्रदूषण और रासायनिक कचरा पाया गया था। वैज्ञानिकों का कहना है कि इन जहरीले तत्वों ने टोड के भ्रूण के विकास में बाधा डाली, जिससे ऐसा विचित्र बदलाव हो गया।

चमत्कारिक रूप से जीवित रहा टोड
सबसे हैरान करने वाली बात यह थी कि इतनी भयानक विकृति के बावजूद यह टोड सामान्य तरीके से जीवित था। वह चल-फिर सकता था, खाना पकड़ता था, और बाकी टोड्स की तरह व्यवहार करता था। इसने साबित कर दिया कि प्रकृति कितनी अद्भुत और अनोखी हो सकती है।

विज्ञान के लिए बना रहस्य
यह टोड आज भी विज्ञान की दुनिया में एक “बायोलॉजिकल मिस्ट्री” माना जाता है। वैज्ञानिक कहते हैं कि यह घटना हमें याद दिलाती है कि जीवन कितना रहस्यमय और जटिल है — और हम अभी भी प्रकृति की गहराई को पूरी तरह नहीं समझ पाए हैं।

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