Kanpur Kidney Racket: 80 लाख लेकर महिला को मरने छोड़ा, MBA छात्र भी बना शिकार, फ्लाइट से आकर सर्जरी करते थे OT टेक्निशियन

Edited By Anil Kapoor,Updated: 02 Apr, 2026 09:18 PM

kanpur kidney racket woman left to die after taking rs 80 lakh

Kanpur News: उत्तर प्रदेश के कानपुर जिले में उजागर हुए अवैध किडनी ट्रांसप्लांट रैकेट ने अब एक बेहद डरावना मोड़ ले लिया है। बिजनौर की रहने वाली 30 वर्षीय पारुल तोमर, जिन्होंने करीब 80 लाख रुपए खर्च कर अपनी किडनी बदलवाई थी, अब गंभीर इन्फेक्शन के चलते...

Kanpur News: उत्तर प्रदेश के कानपुर जिले में उजागर हुए अवैध किडनी ट्रांसप्लांट रैकेट ने अब एक बेहद डरावना मोड़ ले लिया है। बिजनौर की रहने वाली 30 वर्षीय पारुल तोमर, जिन्होंने करीब 80 लाख रुपए खर्च कर अपनी किडनी बदलवाई थी, अब गंभीर इन्फेक्शन के चलते जिंदगी और मौत के बीच जूझ रही हैं। उन्हें कानपुर के अस्पताल से लखनऊ के राम मनोहर लोहिया (RML) अस्पताल रेफर कर दिया गया है।

पैसे और किडनी दोनों गए, अब जिंदगी पर संकट
पारुल तोमर को किडनी देने वाला शख्स बिहार का रहने वाला एमबीए छात्र आयुष है, जो फिलहाल उत्तराखंड में रह रहा था।जालौन के रहने वाले ड्राइवर शिवम ने आयुष को अपने जाल में फंसाया और किडनी देने के लिए राजी किया। ऑपरेशन के बाद पारुल की हालत बिगड़ने लगी। डॉक्टरों के अनुसार, ट्रांसप्लांट के बाद होने वाले इन्फेक्शन और अन्य जटिलताओं के कारण उन्हें लखनऊ भेजना पड़ा है। गुरुवार को दो एम्बुलेंस और डॉक्टरों की टीम के साथ उन्हें रवाना किया गया।

फ्लाइट से ऑपरेशन करने आते थे किराए के टेक्नीशियन
कानपुर पुलिस की जांच में इस सिंडिकेट की कार्यप्रणाली को लेकर चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। पुलिस ने दो ओटी (OT) असिस्टेंट कुलदीप सिंह राघव (हापुड़) और राजेश कुमार (गाजियाबाद) को गिरफ्तार किया है। ये दोनों आरोपी नोएडा और गाजियाबाद के बड़े अस्पतालों में काम करते हैं। ये आरोपी दिल्ली से कानपुर 'फ्लाइट' से अवैध ऑपरेशन करने आते थे। हर केस के लिए इन्हें 35 से 40 हजार रुपए मिलते थे। इनका मुख्य काम सर्जरी के उपकरण और दवाएं मुहैया कराना था।

मेरठ के अल्फा अस्पताल तक जुड़े तार
इस मामले की गूंज अब मेरठ तक पहुंच गई है। कानपुर पुलिस की एफआईआर (FIR) में मेरठ के गढ़ रोड स्थित अल्फा हॉस्पिटल के कई डॉक्टरों के नाम सामने आए हैं। मेरठ के सीएमओ डॉ. अशोक कटारिया ने अल्फा हॉस्पिटल को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। डॉ. अफजल, डॉ. अनुराग, डॉ. वैभव, डॉ. रोहित और फिजियोथेरेपिस्ट अमित समेत कई अन्य लोगों की भूमिका की जांच की जा रही है। मेरठ पुलिस और खुफिया विभाग (LIU) की टीमें लगातार अस्पताल पहुंचकर छानबीन कर रही हैं।

पुलिस की सख्त कार्रवाई और लुकआउट नोटिस
कानपुर कमिश्नरी पुलिस इस अवैध नेटवर्क को पूरी तरह खत्म करने में जुटी है। अब तक 6 आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है।
फरार डॉक्टरों और सिंडिकेट के अन्य सदस्यों के खिलाफ लुकआउट नोटिस जारी किया गया है ताकि वे देश छोड़कर न भाग सकें। रविवार को आहूजा नर्सिंग होम में हुए अवैध ऑपरेशन के बाद से ही छापेमारी जारी है।

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