Edited By Purnima Singh,Updated: 22 Mar, 2026 04:37 PM

धर्म और पारिवारिक जीवन के बीच संतुलन को लेकर एक दिलचस्प मामला इन दिनों चर्चा में है। Premanand Maharaj के आश्रम में हुई एक महिला भक्त की निजी समस्या पर दिया गया उनका जवाब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है और लोगों के बीच बहस का विषय बन गया है...
वृंदावन: धर्म और पारिवारिक जीवन के बीच संतुलन को लेकर एक दिलचस्प मामला इन दिनों चर्चा में है। Premanand Maharaj के आश्रम में हुई एक महिला भक्त की निजी समस्या पर दिया गया उनका जवाब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है और लोगों के बीच बहस का विषय बन गया है।
आश्रम में उठाया निजी जीवन का सवाल
जानकारी के अनुसार, महिला भक्त श्री हित राधा केलि कुंज आश्रम पहुंची थीं, जहां उन्होंने अपने वैवाहिक जीवन से जुड़ी दुविधा संत के सामने रखी। महिला ने बताया कि वह भक्ति और आध्यात्म की ओर अधिक झुकाव महसूस कर रही हैं, जिसके चलते उनकी शारीरिक इच्छाएं कम हो गई हैं, जबकि उनके पति की अपेक्षाएं अलग हैं। इस स्थिति ने उनके लिए मानसिक और शारीरिक असहजता पैदा कर दी है।
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‘गृहस्थ धर्म भी उतना ही महत्वपूर्ण’
महिला की बात सुनने के बाद प्रेमानंद महाराज ने संतुलित दृष्टिकोण रखते हुए कहा कि केवल साधना या जप ही धर्म नहीं है, बल्कि पारिवारिक जिम्मेदारियों का निर्वहन भी उतना ही जरूरी है। उन्होंने गृहस्थ जीवन को धर्म का अहम हिस्सा बताते हुए रिश्तों में संतुलन बनाए रखने पर जोर दिया।
संतुलन और संवाद पर जोर
महाराज ने कहा कि पति-पत्नी के बीच आपसी समझ और संवाद सबसे महत्वपूर्ण है। यदि दोनों की सोच या जीवनशैली अलग हो, तो बातचीत और सहमति के जरिए संतुलन बनाना जरूरी है। उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि महिला अपने पति से मित्रवत तरीके से बात करें और उन्हें धीरे-धीरे अध्यात्म की ओर प्रेरित करने का प्रयास करें।
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रिश्तों में दूरी से बचने की सलाह
महाराज ने चेताया कि वैवाहिक जीवन में उपेक्षा या दूरी भविष्य में तनाव और गलतफहमियों को जन्म दे सकती है। ऐसे में सहयोग, धैर्य और आपसी सम्मान बनाए रखना बेहद जरूरी है।
सोशल मीडिया पर बहस
इस वीडियो के सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर लोगों की मिली-जुली प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। कुछ लोग इसे व्यावहारिक सलाह बता रहे हैं, जबकि अन्य यूजर्स व्यक्तिगत स्वतंत्रता और सहमति को अधिक अहम मानते हुए अलग राय रख रहे हैं। कुल मिलाकर, यह मामला न सिर्फ आध्यात्म और गृहस्थ जीवन के बीच संतुलन की बात करता है, बल्कि आधुनिक रिश्तों में संवाद और समझदारी की अहमियत को भी उजागर करता है।