यूपी में बेरोजगार हुए 22 हजार शिक्षकों को मिल सकती है राहत; सीएम योगी ने दिए ये निर्देश

Edited By Pooja Gill,Updated: 02 Apr, 2026 04:20 PM

22 000 unemployed teachers in up may get relief cm yogi

लखनऊ: उत्तर प्रदेश में करीब 26 महीने पहले 'मदरसा आधुनिकीकरण योजना' बंद होने से बेरोजगार हुए लगभग 22 हजार शिक्षकों को राहत मिल सकती है...

लखनऊ: उत्तर प्रदेश में करीब 26 महीने पहले 'मदरसा आधुनिकीकरण योजना' बंद होने से बेरोजगार हुए लगभग 22 हजार शिक्षकों को राहत मिल सकती है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इन शिक्षकों के ''समायोजन'' के रास्ते तलाशने के लिये एक कार्ययोजना बनाने का निर्देश दिया है। प्रदेश के अल्पसंख्यक कल्याण राज्य मंत्री दानिश आजाद अंसारी ने बताया कि मुख्यमंत्री ने मंगलवार को यह कार्ययोजना बनाने के आदेश दिये हैं ताकि मदरसा आधुनिकीकरण योजना के शिक्षकों को राहत मिल सके। 

क्यों आया शिक्षकों के रोजगार पर संकट? 
अंसारी ने को बताया कि वर्ष 2023-24 में मदरसा आधुनिकीकरण योजना बंद होने से इसके तहत तैनात किये गये शिक्षकों के रोजगार पर संकट आया है। उन्होंने बताया कि इसे लेकर उनकी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से लगातार बातचीत हो रही थी और मंगलवार को मुख्यमंत्री की समीक्षा बैठक में इस पर सकारात्मक चर्चा हुई। अंसारी ने कहा, ''मुख्यमंत्री ने कहा है कि वर्ष 1995 में शुरू होकर 2023-24 में बंद हुई मदरसा आधुनिकीकरण योजना के तहत नियुक्त किये गये करीब 22 हजार शिक्षकों ने राज्य की शिक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिये लम्बे समय तक काम किया है। उन्हें उनके अधिकारों से वंचित नहीं किया जाएगा। 

राज्य सरकार करेगी विमर्श  
राज्य सरकार इस बारे में विमर्श करेगी कि मदरसा शिक्षा में इन शिक्षकों को कैसे समायोजित किया जाए।'' मंत्री ने बताया कि इसके लिये मुख्यमंत्री ने एक कार्ययोजना बनाने का निर्देश दिया है। अंसारी ने बताया कि योजना बंद होने के कारण बेरोजगार हो चुके मदरसा आधुनिकीकरण शिक्षकों की समस्याओं के समाधान के लिये निरंतर प्रयास जारी थे और इस सिलसिले में एक उच्च स्तरीय बैठक भी हुई थी। अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि केंद्र सरकार द्वारा वर्ष 1995 में मदरसा आधुनिकीकरण योजना देश के मदरसों में बच्चों को दीनी तालीम के साथ-साथ अंग्रेजी, हिंदी, सामाजिक विज्ञान, विज्ञान और गणित जैसे आधुनिक विषय पढ़ाने के लिये शुरू की गयी थी। 

टीचरों को नहीं मिला 26 महीने से वेतन 
सूत्रों ने बताया कि इसके तहत उत्तर प्रदेश में लगभग 22 हजार तदर्थ शिक्षक नियुक्त किये गये थे, जो अनुदान प्राप्त तथा गैर अनुदानित मदरसों में शिक्षा देते थे लेकिन योजना बंद होने से उन्हें पिछले लगभग 26 महीने से वेतन नहीं मिला है। 'टीचर्स एसोसिएशन मदारिस अरबिया उत्तर प्रदेश' के महासचिव दीवान साहब ज़मां खां ने कहा कि अगर सरकार आधुनिकीकरण योजना के मदरसा शिक्षकों को समायोजित करने की योजना बना रही है तो यह स्वागत योग्य है। 

'केंद्र सरकार की थी पहले ये योजना'
अंसारी ने कहा कि ये योजना पहले पूरी तरह से केंद्र सरकार की थी और तब पूरा धन केंद्र सरकार ही देती थी। उन्होंने बताया कि तब केंद्र बीए और इंटर पास शिक्षकों को प्रतिमाह छह हजार रुपये और बीएड तथा एमए पास शिक्षकों को 12 हजार रुपये देती थी। खां ने बताया कि उसके बाद उत्तर प्रदेश की तत्कालीन अखिलेश यादव सरकार ने वर्ष 2014-15 में राज्य के हिस्से के रूप में बीए और इंटरमीडिएट उत्तीर्ण शिक्षकों को दो-दो हजार और बीएड तथा एमए पास शिक्षकों को तीन-तीन हजार रुपये देना शुरू किया था। उन्होंने बताया कि ये शिक्षक अमूमन गैर अनुदान प्राप्त मदरसों में अंग्रेजी, हिंदी, सामाजिक विज्ञान, विज्ञान, गणित जैसे आधुनिक विषय पढ़ाते थे। खां ने बताया कि अनुदान प्राप्त मदरसों में तो इन विषयों के शिक्षक थे मगर गैर अनुदान प्राप्त मदरसों में नहीं थे, इसी वजह से केंद्र सरकार ने यह योजना शुरू की थी। 

क्यों बंद हुई योजना? 
खां ने बताया कि वर्ष 2023-25 में केंद्र सरकार ने अपना अंश देना बंद कर दिया, जिसके बाद यह योजना बंद हो गयी और मदरसा आधुनिकीकरण योजना के शिक्षकों पर आजीविका का संकट पैदा हो गया। उन्होंने कहा कि अगर सरकार इन शिक्षकों का समायोजन करती है तो बहुत अच्छा है। एक शिक्षक ने को बताया कि अगर सरकार समायोजन की कार्यवाही करती है तो इससे बेरोजगार हुए मदरसा आधुनिकीकरण शिक्षकों को राहत मिलेगी। हालांकि, उन्होंने इस बात का जिक्र किया कि मदरसा आधुनिकीकरण योजना के तहत नियुक्त शिक्षकों को बहुत कम तनख्वाह मिलती थी। उन्होंने उम्मीद जताई कि सरकार इस ओर भी ध्यान देगी। 

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