रेलवे ट्रैक पर सोलर कैमरों का LIVE जाल: गाजियाबाद Police ने दबोचे देश के गद्दार, ऐसे हो रही थी सेना की जासूसी

Edited By Anil Kapoor,Updated: 21 Mar, 2026 06:41 AM

ghaziabad police busted isi network spying on the army

Ghaziabad News: भारत की आंतरिक सुरक्षा में सेंध लगाने की एक बड़ी साजिश को नाकाम करते हुए गाजियाबाद पुलिस ने ऑपरेशन सिंदूर के तहत एक अंतरराष्ट्रीय जासूसी नेटवर्क का भंडाफोड़ किया है। यह नेटवर्क पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI के इशारे पर भारतीय सेना...

Ghaziabad News: भारत की आंतरिक सुरक्षा में सेंध लगाने की एक बड़ी साजिश को नाकाम करते हुए गाजियाबाद पुलिस ने ऑपरेशन सिंदूर के तहत एक अंतरराष्ट्रीय जासूसी नेटवर्क का भंडाफोड़ किया है। यह नेटवर्क पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI के इशारे पर भारतीय सेना की गतिविधियों और संवेदनशील प्रतिष्ठानों की जानकारी सीमा पार भेज रहा था।

लाइव फीड के लिए सोलर CCTV कैमरों का जाल
जांच में बेहद चौंकाने वाली जानकारी सामने आई है। गिरफ्तार किए गए आरोपी दिल्ली और सोनीपत रेलवे स्टेशन जैसे महत्वपूर्ण स्थानों पर सोलर पावर्ड CCTV कैमरे छिपाकर लगाने की योजना बना रहे थे। इन कैमरों का उद्देश्य भारतीय सेना की आवाजाही, हथियारों के परिवहन और ट्रेन के मूवमेंट की लाइव फीड (सीधा प्रसारण) पाकिस्तान में बैठे हैंडलर्स को देना था।

नेटवर्क का मास्टरमाइंड और प्रमुख गिरफ्तारियां
इस पूरे रैकेट का संचालन सुहैल मलिक उर्फ रोमियो, नौशाद अली और समीर उर्फ शूटर कर रहे थे। पुलिस ने अब तक कुल 11 लोगों को गिरफ्तार किया है, जिनमें मुख्य साजिशकर्ता सुहैल मलिक और सक्रिय भूमिका निभाने वाली महिला साने इरम उर्फ महक शामिल है। अन्य गिरफ्तार आरोपियों में प्रवीन, राज वाल्मीकि, शिवा वाल्मीकि और रितिक गंगवार के नाम शामिल हैं। पुलिस फिलहाल फरार आरोपी नौशाद अली और समीर की सरगर्मी से तलाश कर रही है।

जासूसी का आधुनिक तरीका, Apps और GPS लोकेशन
यह नेटवर्क तकनीक का सहारा लेकर जासूसी कर रहा था। पूछताछ में पता चला कि आरोपियों के फोन में खास Spying Applications इंस्टॉल करवाए गए थे। इन ऐप्स को चलाने की ट्रेनिंग पाकिस्तान के हैंडलर्स ने ऑनलाइन दी थी। नेटवर्क के सदस्य सुरक्षा ठिकानों की फोटो, वीडियो और सटीक GPS लोकेशन विदेश भेजते थे। पुलिस ने दिल्ली कैंट और सोनीपत से कुछ छिपाए गए कैमरे भी बरामद किए हैं।

SIT की कार्रवाई और जांच का दायरा
इस मामले की शुरुआत 14 मार्च 2026 को कौशांबी पुलिस द्वारा संदिग्ध युवकों को पकड़ने से हुई थी। मामले की गंभीरता को देखते हुए एक विशेष जांच टीम (SIT) का गठन किया गया, जिसमें क्राइम ब्रांच, इंटेलिजेंस और साइबर सेल के अधिकारी शामिल हैं। 20 मार्च को 9 और आरोपियों को पकड़ा गया, जिनमें 5 नाबालिग भी शामिल हैं, जिन्हें पैसों का लालच देकर इस काम में लगाया गया था।

सिम कार्ड और पैसों का लेन-देन
पकड़े जाने से बचने के लिए आरोपियों ने चालाकी भरे तरीके अपनाए। भारतीय नंबरों के OTP पाकिस्तान भेजकर वहां से व्हाट्सएप और सोशल मीडिया अकाउंट संचालित किए जा रहे थे। स्नैचिंग (झपट्टा मारकर छीने गए फोन) या दूसरों के नाम पर फर्जी तरीके से सिम हासिल किए गए। पैसे सीधे बैंक खातों में लेने के बजाय जन सेवा केंद्रों या दुकानों के जरिए नकद (Cash) में लिए जाते थे ताकि डिजिटल ट्रेल ना मिल सके। वहीं इस नेटवर्क ने मोबाइल मैकेनिक और CCTV एक्सपर्ट जैसे तकनीकी युवाओं को पैसों का लालच देकर अपने साथ जोड़ा था। यह रैकेट उत्तर प्रदेश, बिहार और महाराष्ट्र से लेकर नेपाल तक फैला हुआ था।

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