दिल्ली रेड फोर्ट ब्लास्ट केस में बड़ा खुलासा: यूपी ATS ने कानपुर से जम्मू-कश्मीर के मेडिकल छात्र को हिरासत में लिया, डॉ. शाहीन से जुड़ाव के मिले सुराग

Edited By Anil Kapoor,Updated: 13 Nov, 2025 07:16 AM

up ats detains medical student from jammu and kashmir from kanpur

Kanpur News: उत्तर प्रदेश एंटी-टेररिस्ट स्क्वॉड (ATS) ने दिल्ली रेड फोर्ट कार ब्लास्ट केस की जांच के तहत कानपुर से जम्मू-कश्मीर के एक मेडिकल छात्र डॉ. मोहम्मद आरिफ को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया है। वह कानपुर कार्डियोलॉजी इंस्टीट्यूट में...

Kanpur News: उत्तर प्रदेश एंटी-टेररिस्ट स्क्वॉड (ATS) ने दिल्ली रेड फोर्ट कार ब्लास्ट केस की जांच के तहत कानपुर से जम्मू-कश्मीर के एक मेडिकल छात्र डॉ. मोहम्मद आरिफ को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया है। वह कानपुर कार्डियोलॉजी इंस्टीट्यूट में पढ़ाई कर रहा था।

कौन है डॉ. मोहम्मद आरिफ?
डॉ. आरिफ जम्मू-कश्मीर का निवासी है और कानपुर के अशोक नगर इलाके में किराए के फ्लैट में रह रहा था। बुधवार रात यूपी ATS ने उसके ठिकाने पर छापा मारा और उसे हिरासत में ले लिया। सूत्रों के मुताबिक, आरिफ का नाम उस समय सामने आया जब ATS ने पहले से गिरफ्तार डॉ. शाहीन सईद के फोन रिकॉर्ड खंगाले। जांच में पता चला कि दोनों के बीच लंबे समय से संपर्क था। आरिफ NEET-SS 2024 बैच का छात्र है और गणेश शंकर विद्यार्थी मेमोरियल मेडिकल कॉलेज (GSVM) के कार्डियोलॉजी विभाग से जुड़ा हुआ है।

कौन है डॉ. शाहीन सईद — डॉक्टर से आतंकी बनी महिला
गौरतलब है कि हाल ही में गिरफ्तार डॉ. शाहीन सईद के पास से पुलिस को AK-47 राइफल, पिस्टल, जिंदा कारतूस और संदिग्ध सामग्री बरामद हुई थी। शाहीन लखनऊ के कैसरबाग इलाके के कंधारी बाजार की रहने वाली है। उसके पिता शाहिद अहमद अंसारी, उत्तर प्रदेश हेल्थ डिपार्टमेंट में कर्मचारी थे।

शाहीन का सफर: टॉपर छात्रा से संदिग्ध तक
परिवार के अनुसार, शाहीन शुरू से ही पढ़ाई में तेज थी और डॉक्टर बनना चाहती थी। उसने लखनऊ के लालबाग स्थित गर्ल्स स्कूल से पढ़ाई की, जहाँ वह 10वीं और 12वीं दोनों में टॉपर रही। बाद में उसने CPMT परीक्षा पास की और प्रयागराज के मोतीलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज से MBBS और MD की डिग्री हासिल की। साल 2006 में UPPSC के जरिए वह कानपुर के GSVM मेडिकल कॉलेज में असिस्टेंट प्रोफेसर बनी। 2009 में उसका ट्रांसफर कन्नौज मेडिकल कॉलेज में हुआ, लेकिन 2010 में वह फिर से कानपुर लौट आई।

गायब रहने लगी और फिर बर्खास्त कर दी गई
साल 2013 के बाद शाहीन अचानक कई दिनों तक कॉलेज से गायब रहने लगी। कई बार नोटिस भेजे गए, पर कोई जवाब नहीं मिला। आखिरकार अनुशासनहीनता और ड्यूटी में लापरवाही के आरोप में उसे 2021 में नौकरी से बर्खास्त कर दिया गया। इसके बाद वह फरीदाबाद की अल-फलाह यूनिवर्सिटी में असिस्टेंट प्रोफेसर बनी। यहीं उसकी मुलाकात डॉ. मुजम्मिल गनाई से हुई — जो अब फरीदाबाद मॉड्यूल का मुख्य आरोपी बताया जा रहा है।

निजी जिंदगी और कट्टरता की तरफ झुकाव
शाहीन का निकाह 2004 में प्रयागराज के नेत्र चिकित्सक डॉ. जफर सईद से हुआ था, लेकिन दोनों का 2015 में तलाक हो गया। तलाक के बाद वह लखनऊ में अपने परिवार के साथ रह रही थी, लेकिन पिछले डेढ़ साल से परिवार से उसका संपर्क टूट गया था। पूर्व पति डॉ. जफर ने बताया कि शाहीन धीरे-धीरे धार्मिक और कट्टर विचारों की तरफ झुकने लगी थी। वह मुस्लिम लड़कियों को हिजाब और बुर्का पहनने की सलाह देने लगी थी। जबकि उसके पुराने साथी बताते हैं कि पहले वह खुली सोच और प्रोग्रेसिव विचारों वाली थी और बुर्के के खिलाफ रहती थी।

गिरफ्तारी और हथियार बरामदगी
ATS ने डॉ. मुजम्मिल गनाई की निशानदेही पर शाहीन को गिरफ्तार किया। गिरफ्तारी के दौरान उसकी कार से AK-47 राइफल, पिस्टल, जिंदा कारतूस और अन्य संदिग्ध सामान मिला। अब ATS यह पता लगाने में जुटी है कि शाहीन और आरिफ के बीच किस तरह का संपर्क था और क्या दोनों किसी बड़े नेटवर्क से जुड़े हुए हैं।

जांच जारी
फिलहाल, ATS ने डॉ. आरिफ को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया है। दोनों डॉक्टरों के बीच हुई बातचीत, फोन कॉल्स और सोशल मीडिया चैट्स की गहराई से जांच की जा रही है। ATS और केंद्रीय एजेंसियाँ मिलकर यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि क्या यह आतंकी नेटवर्क से जुड़ा कोई बड़ा प्लान था।

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