कोरोना के पहले स्ट्रेन की अपेक्षा दूसरा स्ट्रेन ज्यादा खतरनाक, अब गरीबों की मदद के लिए नहीं बढ़ रहे हाथ

Edited By Anil Kapoor,Updated: 21 Apr, 2021 05:42 PM

this time in auraiya there are no moving hands to help corona

उत्तर प्रदेश के औरैया जिले में कोरोना वायरस के पहले स्ट्रेन की अपेक्षा दूसरा स्ट्रेन ज्यादा खतरनाक होने के वावजूद इस बार जनप्रतिनिधियों, समाजसेवियों, बुद्धजीवियों, शिक्षकों, व्यापारियों , समाजसेवी संस्थाओं यहां तक कि गेल व एनटीपीसी तक के अधिकारियों...

औरैया: उत्तर प्रदेश के औरैया जिले में कोरोना वायरस के पहले स्ट्रेन की अपेक्षा दूसरा स्ट्रेन ज्यादा खतरनाक होने के वावजूद इस बार जनप्रतिनिधियों, समाजसेवियों, बुद्धजीवियों, शिक्षकों, व्यापारियों , समाजसेवी संस्थाओं यहां तक कि गेल व एनटीपीसी तक के अधिकारियों द्वारा संक्रमण से लड़ने के लिए गरीबों की मदद करने को हाथ आगे नहीं बढ़ा रहे हैं। जिले में पिछली बार कोरोना का पहला स्ट्रेन मार्च में आया था और जिले में 2 अप्रैल 2020 को 13 तब्दीली जमातियों में 4 लोगों के कोरोना संक्रमित निकले के बाद पूरे जिले में संक्रमण के प्रति भय एवं दहशत का माहौल बन गया था, लोग घरों में दुबक कर बैठ गए थे।

लॉकडाउन लगने के बाद अप्रवासियों ने घरों की वापसी शुरू कर दी थी। जिसके बाद जो माहौल बना था उससे निपटने के लिए जिला प्रशासन की अपील पर तमाम जनप्रतिनिधि, समाजसेवी, बुद्धजीवी, शिक्षक, व्यापारी, समाजसेवी संस्थाएं व गेल व एनटीपीसी जैसी कम्पनियां मदद को आगे आईं, जिनके द्वारा जिला प्रशासन को न केवल आर्थिक मदद दी गई, बल्कि मास्क, सेनेटाइजर, लंच पैकेट आदि का बड़ी मात्रा में महीनों वितरण किया गया था। यही नहीं बच्चों तक ने बचत कर अपनी गुल्लक में जमा की धनराशि को जिला प्रशासन को सौंप दी थी ताकि इस महामारी की चेन को तोड़ा जा सके।

इस बार 22 मार्च के बाद आया कोरोना का दूसरे स्ट्रेन पहले से ज्यादा खतरनाक है। जिससे कोरोना संक्रमित मरीजों की संख्या में न केवल अचानक से वृद्धि हुई है बल्कि इसके प्रभाव में आकर मरने वाले मरीजों की संख्या पहले की तुलना में काफी ज्यादा है। जिले में इस वर्ष 23 मार्च से संक्रमित मरीजों का इकाई में मिलना शुरू हुआ, जो 3 अप्रैल से दहाई में और 13 अप्रैल से सैंकड़ा में पहुंच गया। जिससे आज एक्टिव केसों की संख्या 1616 है, जबकि 322 मरीज ठीक भी हो चुके हैं, वहीं इस दौरान 14 लोगों की दु:खद मौत हो गई।

इसके बावजूद अभी तक गरीबों की मदद के लिए समाज का कोई भी वर्ग, न तो आर्थिक मदद के लिए और न ही मास्क व सेनेटाइजर बांटने के लिए खुलकर सामने आ रहा है। यही नहीं पिछली बार की तुलना में प्रशासनिक स्तर से भी मास्क व सेनेटाइजर का वितरण कहीं भी नहीं दिखाई दे रहा है। जिले में तीसरे चरण यानि 26 अप्रैल को होने वाले पंचायत चुनाव में भी प्रशासनिक व पुलिस अधिकारी व्यस्त है।

Related Story

Trending Topics

img title
img title

Be on the top of everything happening around the world.

Try Premium Service.

Subscribe Now!