सुप्रीम कोर्ट के आदेश ने शिक्षकों की बढ़ाई टेंशन, TET अनिवार्यता को लेकर बेसिक शिक्षकों ने दिया धरना, सौंपा ज्ञापन

Edited By Ramkesh,Updated: 11 Sep, 2025 08:28 PM

supreme court s order increased the tension of teachers

सुप्रीम कोर्ट द्वारा TET अनिवार्यता के दिए गए आदेश से नाराज महोबा में उत्तर प्रदेशीय जूनियर हाईस्कूल शिक्षक संघ के बैनर तले शिक्षकों ने कलेक्ट्रेट में धरना देकर प्रदर्शन किया है। शिक्षकों को आदेश में शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) को अनिवार्य करने...

महोबा (अमित श्रोती ): सुप्रीम कोर्ट द्वारा TET अनिवार्यता के दिए गए आदेश से नाराज महोबा में उत्तर प्रदेशीय जूनियर हाईस्कूल शिक्षक संघ के बैनर तले शिक्षकों ने कलेक्ट्रेट में धरना देकर प्रदर्शन किया है। शिक्षकों को आदेश में शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) को अनिवार्य करने की बात कही गई है, जिससे पूर्व में नियुक्त हजारों शिक्षकों की सेवा पर संकट गहराने लगा है।जिसको लेकर प्रधानमंत्री व मानव संसाधन विकास मंत्री को संबोधित एक ज्ञापन भी सौंपा गया है।

शिक्षक संघ का कहना है कि वर्ष 2010 से पहले नियुक्त शिक्षकों ने सेवा शर्तों के तहत लंबा कार्यकाल पूरा किया है और इनकी सेवाएं नियमित की गई थीं। लेकिन नए आदेश के चलते उनकी नौकरी खतरे में पड़ सकती है। संगठन का कहना है कि 23 अगस्त 2010 को लागू शिक्षा अधिकार अधिनियम और 2011 में आए संशोधन के बाद भी इन शिक्षकों की सेवाएं सुरक्षित थीं। अब नए फैसले से न केवल शिक्षकों बल्कि उनके परिवारों के सामने भी आजीविका का संकट खड़ा हो गया है। धरने में बैठे अध्यापकों  ने कहा कि इस फैसले से लगभग 700 अध्यापक और प्रदेश के लगभग 4 लाख शिक्षक इस फैसले से प्रभावित होंगे। कई शिक्षक उम्रदराज हो चुके हैं और नई पात्रता परीक्षा देना उनके लिए असंभव है। वहीं महिला शिक्षकों और दिव्यांगजनों पर इसका विशेष दुष्प्रभाव पड़ेगा।

जूनियर हाईस्कूल शिक्षक संघ के जिला अध्यक्ष राजीव कुमार तिवारी ने कहा कि मांग पत्र में केंद्र सरकार और एनसीटीई से आग्रह किया गया है कि पूर्व नियुक्त शिक्षकों को राहत दी जाए और टीईटी से मुक्त रखा जाए। साथ ही सेवा शर्तों को सुरक्षित रखते हुए उनकी नियुक्तियों को मान्यता प्रदान की जाए। अध्यापकों का कहना है कि यदि उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं किया गया तो लाखों शिक्षक सड़कों पर उतरने को मजबूर होंगे। संगठन ने सरकार से जल्द सकारात्मक हस्तक्षेप की अपेक्षा जताई है, ताकि शिक्षकों और उनके परिवारों का भविष्य सुरक्षित रह सके।

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