यूपी के इन जिलों में बनेगा 'सारस सकिर्ट', संरक्षण के साथ इको-टूरिज्म को मिलेगा बढ़ावा

Edited By Pooja Gill,Updated: 06 Mar, 2026 04:13 PM

saras circuit  will be built in these districts of up

लखनऊ: उत्तर प्रदेश सरकार राज्य के राजकीय पक्षी सारस के संरक्षण और इको-टूरिज्म को बढ़ावा देने के लिए मैनपुरी और इटावा जिलों में 'सारस सकिर्ट' विकसित कर रही है...

लखनऊ: उत्तर प्रदेश सरकार राज्य के राजकीय पक्षी सारस के संरक्षण और इको-टूरिज्म को बढ़ावा देने के लिए मैनपुरी और इटावा जिलों में 'सारस सकिर्ट' विकसित कर रही है। इस पहल के तहत वेटलैंड क्षेत्रों का संरक्षण करते हुए पर्यटन सुविधाओं का भी विस्तार किया जाएगा, जिससे स्थानीय लोगों को रोजगार के अवसर मिलेंगे और पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ेगी।

इन क्षेत्र को जोड़कर तैयार होगा सारस सकिर्ट
वन विभाग के माध्यम से इस परियोजना को विकसित किया जा रहा है। इसके अंतर्गत मैनपुरी के किर्थुआ, सहस, कुरर जरावां, सौज और समन के साथ इटावा के सरसई नावर तथा परौली रामायण वेटलैंड क्षेत्र को जोड़कर सारस सकिर्ट तैयार किया जाएगा। सारस सकिर्ट के तहत इन वेटलैंड क्षेत्रों में पर्यटकों के लिए कई सुविधाएं विकसित की जाएंगी। इनमें प्रवेश द्वार, व्यू प्वाइंट, डेक और बोटिंग स्पॉट, बटरफ्लाई गाडर्न, सोलर साइट लाइटिंग और इंटरप्रिटेशन सेंटर जैसी व्यवस्थाएं शामिल होंगी। इसके अलावा सूचना केंद्र, ईको-टॉयलेट, पार्किंग, इंटरैक्टिव साइनेज, फूड कियोस्क तथा ओडीओपी और स्मृति चिन्ह की दुकानें भी स्थापित की जाएंगी। 

इन सुविधाओं के माध्यम से पर्यटक सारस के प्राकृतिक आवास को करीब से देख सकेंगे और वेटलैंड पारिस्थितिकी तंत्र को समझने का अवसर मिलेगा। दुनिया के सबसे लंबे उड़ान भरने वाले पक्षियों में शामिल सारस क्रेन का प्रमुख आवास उत्तर प्रदेश के मैनपुरी, इटावा, एटा और अलीगढ़ के वेटलैंड क्षेत्र हैं। 

सरकार का मानना है...
सारस सकिर्ट के विकास से इन वेटलैंड्स का संरक्षण मजबूत होगा और अन्य पक्षियों जैसे ग्रे हेरॉन और ओपन-बिल्ड स्टॉकर् के लिए भी सुरक्षित वातावरण उपलब्ध होगा। यह पहल भू-जल स्तर को बनाए रखने, जलाशयों के संरक्षण और जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को कम करने में भी सहायक मानी जा रही है। साथ ही इको-टूरिज्म गतिविधियों के विस्तार से स्थानीय समुदाय को रोजगार और आय के नए अवसर मिलेंगे। सरकार का उद्देश्य है कि सारस को उसके प्राकृतिक वातावरण में सुरक्षित रखते हुए जैव विविधता का संरक्षण किया जाए और प्रदेश में सतत विकास की अवधारणा को आगे बढ़ाया जाए। 


 

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