राहत की खबर; यूपी में 1 लाख शिक्षाप्रेरकों को जल्द मिलेगा मानदेय! आदेश जारी

Edited By Pooja Gill,Updated: 13 Apr, 2026 12:56 PM

relief news 1 lakh education motivators in up will soon receive honorarium

लखनऊ: उत्तर प्रदेश के करीब एक लाख पूर्व शिक्षाप्रेरकों (शिक्षा प्रेरक) के लिए राहत की खबर है। राज्य सरकार साक्षर भारत मिशन के तहत लंबित पड़े 400 करोड़ रुपये से अधिक मानदेय...

लखनऊ: उत्तर प्रदेश के करीब एक लाख पूर्व शिक्षाप्रेरकों (शिक्षा प्रेरक) के लिए राहत की खबर है। राज्य सरकार साक्षर भारत मिशन के तहत लंबित पड़े 400 करोड़ रुपये से अधिक मानदेय का भुगतान जल्द कर सकती है। सूत्रों की मानें तो साक्षरता, वैकल्पिक शिक्षा, उर्दू एवं प्राच्य भाषाएं विभाग के निदेशक अनिल भूषण चतुर्वेदी ने प्रदेश के 60 जिलों में अधिकारियों को पात्र शिक्षाप्रेरकों का सत्यापन कर विस्तृत डेटा उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं। इस संबंध में डायट के प्राचार्यों, बीएसए और डीआईओएस को 15 दिन के भीतर रिपोर्ट भेजने को कहा गया है, ताकि भुगतान प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा सके। 

योजना बंद होने के बाद से अटका मानदेय 
दरअसल, केंद्र सरकार द्वारा 31 मार्च 2018 को योजना बंद किए जाने के बाद से शिक्षाप्रेरकों का मानदेय अटका हुआ है। ये प्रेरक साक्षरता बढ़ाने के लिए अनुबंध के आधार पर नियुक्त किए गए थे, जिन्हें प्रतिमाह 2000 रुपये मानदेय मिलता था। प्रदेश में 99,482 शिक्षाप्रेरक 49,921 लोक शिक्षा केंद्रों पर कार्यरत थे। योजना के तहत प्रयागराज, वाराणसी, आगरा, गोरखपुर और मेरठ समेत कई जिलों में काम हुआ था। इनका मुख्य कार्य 15 वर्ष से अधिक आयु के लोगों को साक्षर बनाना था, लेकिन योजना बंद होने के बाद अगस्त 2014 से मार्च 2018 तक के 43 महीनों में कई जिलों में इन्हें एक भी महीने का भुगतान नहीं मिल सका। 

45 करोड़ रुपये से अधिक का बकाया
उदाहरण के तौर पर, प्रयागराज में ही 2,633 शिक्षाप्रेरकों का 38 माह का मानदेय लंबित है, जबकि पूरे मंडल में 45 करोड़ रुपये से अधिक का बकाया बताया जा रहा है। इस मुद्दे को लेकर मिर्जापुर सहित कई जिलों के प्रेरकों ने हाईकोटर् और लखनऊ खंडपीठ में याचिकाएं भी दायर की थीं। शिक्षाप्रेरकों का कहना है कि वे वर्षों से भुगतान का इंतजार कर रहे हैं और आर्थिक संकट का सामना कर रहे हैं। ऐसे में सरकार की यह पहल उन्हें राहत देने के साथ ही व्यवस्था पर उनका भरोसा बहाल कर सकती है। 

26 मार्च के आदेश में किया यह अनिवार्य
विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि 26 मार्च के आदेश में यह अनिवार्य किया गया है कि अधिकारी 15 दिनों के भीतर जानकारी जमा करें। यह जानकारी योजना के 2017-18 के ऑडिट के दौरान तैयार की गई ब्लॉक-वार देनदारियों की रिपोर्ट के अनुरूप होनी चाहिए। प्रयागराज के एक शिक्षा प्रेरक ने कहा कि यह एक सकारात्मक कदम है, जिससे आखिरकार हमें राहत मिल सकती है और व्यवस्था में हमारी गरिमा और विश्वास बहाल हो सकता है। इससे घर के खर्चों को संभालना आसान हो जाएगा। 
 

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