उत्तर प्रदेश सरकार की बड़ी योजना, UP बनेगा 'गोसंरक्षण मॉडल स्टेट', IIT इंजीनियर लगाएंगे 300 बायोगैस प्लांट

Edited By Purnima Singh,Updated: 08 Mar, 2026 02:17 PM

plan to install biogas plants in 300 cow shelters

उत्तर प्रदेश सरकार ने अपार संभावनाओं को देखते हुए भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी)-खड़गपुर के एक पूर्व छात्र के सहयोग से 300 गौशालाओं में बायोगैस का संयंत्र लगाने की योजना बनाई है। एक आधिकारिक बयान में शनिवार को यह जानकारी दी गई। बयान में कहा...

लखनऊ : उत्तर प्रदेश सरकार ने अपार संभावनाओं को देखते हुए भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी)-खड़गपुर के एक पूर्व छात्र के सहयोग से 300 गौशालाओं में बायोगैस का संयंत्र लगाने की योजना बनाई है। एक आधिकारिक बयान में शनिवार को यह जानकारी दी गई। बयान में कहा गया कि उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के गौ संरक्षण की सोच को अब आधुनिक तकनीक की शक्ति मिलेगी। उप्र सरकार ने आईआईटी-खड़गपुर के पूर्व छात्र और उनकी टीम के सहयोग से अब उत्तर प्रदेश की 300 से अधिक गोशालाओं में बायोगैस संयंत्र स्थापित करने की योजना बनाई है। इन संयंत्रों के माध्यम से गोबर-गोमूत्र से स्वच्छ ऊर्जा, जैविक खाद एवं अन्य उत्पाद तैयार किए जाएंगे, जो ग्रामीण रोजगार का बड़ा जरिया बनेंगे। 

मुख्यमंत्री के विजन को अब नयी पीढ़ी की तकनीक और युवाओं की ऊर्जा का साथ मिलने से उप्र देश का आधुनिक प्रौद्योगिकी आधारित गौ संरक्षण मॉडल वाला राज्य बनने जा रहा है। बयान के अनुसार गोसेवा आयोग के अध्यक्ष श्याम बिहारी गुप्ता ने बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर पहली बार वैज्ञानिक दृष्टिकोण से गौ संरक्षण को आत्मनिर्भर अर्थव्यवस्था से जोड़ा जा रहा है। उन्होंने कहा कि पंचगव्य से तैयार उत्पादों को उद्योग से जोड़कर युवाओं के लिए आजीविका का नया मॉडल बनेगा। इस पहल की अगुवाई आईआईटी-खड़गपुर के छात्र रहे यशराज गुप्ता कर रहे हैं, जिन्होंने शनिवार को जालौन में अपने चार अन्य साथियों के साथ गोसेवा आयोग की टीम से मिलकर गौ संरक्षण पर काम करने की रणनीति बनाई है। 

जालौन से इस परियोजना की शुरुआत होने जा रही है। खास बात यह है कि यशराज ने एक प्रतिष्ठित सॉफ्टवेयर कंपनी का दो करोड़ रुपये का सालाना पैकेज छोड़कर गोसेवा से जुड़े इस सामाजिक और पर्यावरणीय मिशन को चुना है। यशराज का कहना है कि गो आधारित अर्थव्यवस्था भारत की परंपरा और स्थायी विकास मॉडल, दोनों से जुड़ी है। अगर तकनीक का सही उपयोग किया जाए तो यह ग्रामीण आय बढ़ाने का सशक्त माध्यम बन सकती है। शुरुआत में जालौन जिले की गोशालाओं में बायोगैस संयंत्र स्थापित करने की योजना बनाई गई है, जिनसे जैविक खाद, बायो-सीएनजी और बिजली का उत्पादन किया जा सकेगा। सफल प्रयोग के बाद प्रदेश के 300 से अधिक गो-आश्रय स्थलों में इसी तकनीक का विस्तार किया जाएगा।

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