स्कूटी, मैगी और खिलौनों के लिए मासूमों ने उठाया खौफनाक कदम! कानपुर में बच्चे बेचने लगे मां की ज्वेलरी — मामला जानकर खड़े हो जाएंगे रोंगटे!

Edited By Anil Kapoor,Updated: 23 Nov, 2025 07:49 AM

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Kanpur News: कानपुर जिले में पिछले 15 दिनों में 12 से अधिक मामले सामने आए हैं, जिनमें छोटे-छोटे बच्चे अपने शौक पूरे करने के लिए घर की ज्वेलरी लेकर ज्वेलरी शॉप तक पहुंच गए। यह घटनाएं माता-पिता के लिए चेतावनी हैं कि बच्चों की जरूरतों और इच्छाओं को...

Kanpur News: कानपुर जिले में पिछले 15 दिनों में 12 से अधिक मामले सामने आए हैं, जिनमें छोटे-छोटे बच्चे अपने शौक पूरे करने के लिए घर की ज्वेलरी लेकर ज्वेलरी शॉप तक पहुंच गए। यह घटनाएं माता-पिता के लिए चेतावनी हैं कि बच्चों की जरूरतों और इच्छाओं को नजरअंदाज करना कितनी बड़ी समस्या बन सकती है।

मां के मना करने पर बच्चे उठाने लगे जोखिम भरे कदम
हर बच्चे की कुछ मनपसंद चीजें होती हैं—मैगी, चॉकलेट, खिलौना, स्कूटी या घड़ी। जब माता-पिता महंगी चीजों या शौक के लिए मना करते हैं, तो बच्चे उसका गलत मतलब निकाल लेते हैं। कानपुर के काकादेव, कल्याणपुर, स्वरूप नगर, कर्नलगंज जैसे इलाकों में ऐसे कई मामले सामने आए हैं। छोटे बच्चों ने घर से ज्वेलरी उठाकर दुकान में बेचने का निर्णय लिया।

मासूमों ने बताए चौंकाने वाले कारण
जब दुकानदारों ने बच्चों से पूछा कि वे क्यों ज्वेलरी बेच रहे हैं, तो कई बच्चों ने कहा कि 'मुझे मैगी खानी थी', 'मुझे स्कूटी चाहिए थी', 'मुझे खिलौने चाहिए थे'। कुछ दुकानदारों ने समझदारी दिखाते हुए तुरंत बच्चों के घर फोन किया और माता-पिता को बुलाकर बच्चों और गहनों को सुरक्षित लौटाया। वहीं कुछ मामलों में ज्वेलर्स ने बच्चों से गहने खरीद भी लिए और उन्हें पैसे दे दिए।

पुलिस भी हुई अलर्ट
लगातार बढ़ती घटनाओं के कारण कानपुर पुलिस अब सीधे कार्रवाई की बजाय बच्चों की काउंसलिंग कर रही है। साथ ही, उनके माता-पिता को समझाया जा रहा है कि बच्चों की जरूरतों को समझें और समय दें। 

शास्त्री नगर की मां वैष्णो ज्वेलर्स में अकेले एक महीने में 3 मामले 
शास्त्री नगर स्थित मां वैष्णो ज्वेलर्स में एक महीने में ही तीन बार बच्चे गहने बेचने पहुंचे। पहला बच्चा मैगी के लिए, दूसरा स्कूटी के लिए,  तीसरा खिलौनों के लिए। दुकानदार पुष्पेंद्र जायसवाल ने हर बार पुलिस को सूचित किया और बच्चों के माता-पिता को बुलाया। उन्होंने कहा कि यह स्थिति बेहद चिंताजनक है क्योंकि ये सभी बच्चे नाबालिग हैं। पुलिस ने इन बच्चों पर काउंसलिंग का रास्ता चुना है और ऐसे मामलों को रोकने के लिए विशेष टीम बनाने पर भी विचार किया जा रहा है।

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