हेमवती नंदन बहुगुणा ने उत्तर प्रदेश के विकास को एक नयी ऊंचाई प्रदान की : योगी आदित्‍यनाथ

Edited By Purnima Singh,Updated: 17 Mar, 2026 12:30 PM

cm yogi statement on hemvati nandan bahuguna

उत्तर प्रदेश के मुख्‍यमंत्री योगी आदित्‍यनाथ ने मंगलवार को पूर्व मुख्यमंत्री हेमवती नंदन बहुगुणा की पुण्यतिथि पर उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि उन्‍होंने इस राज्य के विकास को एक नयी ऊंचाई प्रदान की .....

लखनऊ : उत्तर प्रदेश के मुख्‍यमंत्री योगी आदित्‍यनाथ ने मंगलवार को पूर्व मुख्यमंत्री हेमवती नंदन बहुगुणा की पुण्यतिथि पर उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि उन्‍होंने इस राज्य के विकास को एक नयी ऊंचाई प्रदान की। मुख्‍यमंत्री योगी आदित्‍यनाथ ने यहां हेमवती नंदन बहुगुणा की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित करने के बाद कहा, ''हेमवती नंदन बहुगुणा ने स्‍वतंत्र भारत में एक जनप्रतिनिधि, प्रदेश सरकार में मंत्री, मुख्यमंत्री और केंद्रीय मंत्री के रूप में अनेक उल्लेखनीय कार्य किये। उन्‍होंने उत्तर प्रदेश के विकास को एक नयी ऊंचाई प्रदान की और प्रयागराज को एक नयी पहचान दी।'' 

उन्होंने कहा, ''आज हेमवती नंदन बहुगुणा भौतिक रूप से हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनके द्वारा प्रारंभ किया गया कार्य, उनके द्वारा जनप्रतिनिधि, मुख्यमंत्री, केंद्रीय मंत्री के रूप में जो कुछ भी किया गया, वह समाज के प्रत्येक तबके, देश की समृद्धि और आम जन के कल्याण के लिए उदाहरण है।'' मुख्यमंत्री ने कहा, ''हेमवती नंदन बहुगुणा का जन्म तत्कालीन उत्तर प्रदेश और वर्तमान में उत्तराखंड के पौड़ी जिले के एक छोटे-से गांव में हुआ था। प्रारंभिक शिक्षा गांव में अर्जित कर उन्‍होंने आगे की शिक्षा के लिए प्रयागराज की भूमि को चुना। वह आजादी की लड़ाई में छात्र नेता के रूप में शामिल हुए और सामाजिक जनजागरुकता और राष्ट्रीय चेतना को आगे बढ़ाने के लिए उन्होंने लगातार प्रयास किए।'' 

इस मौके पर योगी आदित्यनाथ के साथ उत्तर प्रदेश के उपमुख्‍यमंत्री ब्रजेश पाठक, जल शक्ति मंत्री स्‍वतंत्र देव सिंह, पूर्व सांसद और पूर्व मंत्री रीत बहुगुणा (हेमवती नंदन बहुगुणा की पुत्री) और पूर्व कार्यवाहक मुख्यमंत्री डॉ. अम्मार रिजवी समेत कई प्रमुख लोग मौजूद थे। बहुगुणा का जन्म 25 अप्रैल 1919 को अविभाजित उत्तर प्रदेश के पौड़ी गढ़वाल में हुआ और 17 मार्च 1989 को उनका निधन हो गया। वह भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के नेता रहे और बाद में लोक दल में शामिल हो गये। वह स्वतंत्रता संग्राम के प्रमुख योद्धा थे और 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन में उन्हें अंग्रेजी हुकूमत ने चार वर्षों तक जेल में रखा। 

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